
बहराइच के महाराजा सुहेलदेव स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय और महर्षि बालार्क चिकित्सालय में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा-2026 के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम हुआ। प्रधानाचार्य डॉ. प्रो. संजय खत्री की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित करना था। इसका उद्देश्य नेत्रदान से जुड़ी गलतफहमियों और आशंकाओं को दूर करना भी था। कार्यक्रम में एमबीबीएस के छात्रों ने रंगोली बनाई, हस्ताक्षर अभियान चलाया और नुक्कड़ नाटक पेश किए। इनके जरिए उन्होंने लोगों को नेत्रदान का महत्व समझाया। नुक्कड़ नाटक से छात्रों ने बताया कि मरणोपरांत नेत्रदान से जरूरतमंद लोगों को रोशनी मिल सकती है। इस दौरान डॉक्टरों और कर्मचारियों ने एक संगोष्ठी की। इसमें उन्होंने नेत्रदान की प्रक्रिया और उससे जुड़ी जरूरी जानकारी दी।
प्रधानाचार्य डॉ. प्रो. संजय खत्री ने कहा कि नेत्रदान एक महादान है। हमारे जाने के बाद हमारी आंखें किसी ऐसे व्यक्ति को रोशनी दे सकती हैं, जो अंधेरे में जी रहा है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान सिर्फ रोशनी लौटाने का जरिया नहीं है। यह किसी परिवार के जीवन में उम्मीद और खुशियां लाने का भी काम है। उन्होंने लोगों से मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने और परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने की अपील की। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके वर्मा ने कहा कि नेत्रदान एक अच्छा काम है। समाज में इसके लिए जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने लोगों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने को कहा। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजलि सिंह ने कहा कि नेत्रदान एक बड़ी सामाजिक सेवा है। मरने के बाद दान की गई आंखें किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी भर सकती हैं। उन्होंने लोगों से नेत्रदान के प्रति जागरूक रहने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों और छात्रों ने लोगों के नेत्रदान से जुड़े सवालों के जवाब दिए। साथ ही “नेत्रदान करें, किसी के जीवन में रोशनी भरें” का संदेश भी दिया गया। इस मौके पर डॉ. सूरज मिश्रा, डॉ. बृजेश, हॉस्पिटल मैनेजर, नर्सिंग अधीक्षिका समेत डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, कर्मचारी और एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
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