
विक्रमजोत हर्रैया बस्ती विकास क्षेत्र के धुसवा तटबंध पर शाम करीब ढाई बजे एक टीम पहुंची। यहां ठोकर नंबर दस पर बाढ़ चौकी धुसवा तटबंध जाजूपुर स्थित है, जिसे बाढ़ खंड बस्ती ने कुछ समय पहले बनाया था। बाढ़ के समय यहां बाढ़ खंड का मेट, थाना छावनी से कांस्टेबल और होमगार्ड जवान की ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन मौके पर कोई मौजूद नहीं मिला। कमरे से एक साधु बाहर निकलते हुए दिखे। साधु ने बताया कि रात दस बजे थाने से दो होमगार्ड जवान आते हैं। वे रात में सोते हैं और सुबह करीब तीन बजे उठकर चले जाते हैं। फिर सुबह नौ बजे थाने से एक चौकीदार आता है और शाम चार बजे चला जाता है। कमरे में घुसकर देखने पर वायरलेस सेट धूल से ढका मिला। हैंडसेट उठाया गया तो वह काम नहीं कर रहा था। इसके बाद टीम धुसवा विक्रमजोत तटबंध दुधौरा पूरे कुमार पहुंची। शाम करीब तीन बजे बाढ़ खंड के जेई अपने सात लेबरों के साथ कुर्सी पर बैठे आराम कर रहे थे। उनसे बाढ़ की जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि नदी खतरे के निशान से 200 मिमी ऊपर बह रही है। जेई ने कहा कि स्थिति सामान्य है। उनके लेबर बहुत मेहनती हैं और हर दिन करीब आठ-दस परकूपाइन बनाते हैं, जिससे नदी को आगे बढ़ने से रोका गया है। वहीं, कुछ दूर चलने पर गांव के लोगों ने बताया और दिखाया कि माझा क्षेत्र में रहने वाले दो लोग अपने सात-आठ सदस्यों और करीब बीस-पच्चीस भैंसों के साथ आज भी दोनों धाराओं के बीच पड़ी रेत पर अपने मड़हे में रह रहे हैं। उनकी एक भैंस की तबीयत बिगड़ गई है, जिसे किसी जानवर ने काटा है या किसी और वजह से वह बीमार हुई है। विक्रमजोत से प्राइवेट डॉक्टर राकेश को नाव से उनके मड़हे तक ले जाकर भैंस का इलाज करवाया गया और फिर वापस लाकर छोड़ा गया।
































