जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी समग्रता में विकास चाहता है। इसमें सड़क सुरक्षा के बिंदु को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है।
मंत्रालय का दावा है कि पिछले वर्ष नेशनल हाईवे पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में छह प्रतिशत की कमी आई है और इस वर्ष भी यही ट्रेंड जारी है। ऐसे में यदि देशभर में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी लाना है तो राज्यों को विशेष तौर पर स्थानीय सड़कों पर सुरक्षा उपाय करने होंगे। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यों को प्रस्ताव दिया है कि वह चाहें तो मंत्रालय वहां आकलन कर सुझाव दे सकता है कि कहां किस सुरक्षा उपाय की आवश्यकता है।
हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गुजरात में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया। इसमें एनएचएआइ, अन्य संबंधित एजेंसियों के अलावा राज्यों के परिवहन मंत्री और लोक निर्माण विभाग व अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। विभिन्न सत्रों में अलग-अलग विषयों पर चर्चा हुई, जिनमें सड़क सुरक्षा को भी प्रमुखता से लिया गया।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर कई विशेषज्ञों ने अपने-अपने सुझाव रखे। इसमें यह बात भी आई कि समग्रता में यदि सड़क सुरक्षा को प्रभावी बनाना है तो इसके लिए राज्यों की स्थानीय सड़कों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि देश के कुल रोड नेटवर्क में स्थानीय सड़कों का हिस्सा सबसे बड़ा है।
सचिव ने दावा किया कि पिछले वर्ष के सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों के सामने आया कि नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों में छह प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस वर्ष भी उससे छह प्रतिशत की गिरावट का अनुमान अभी तक है। यह सब नेशनल हाईवे पर तकनीकी और अन्य सुरक्षा उपायों को अपनाने के कारण संभव हुआ है।
राज्यों से कहा है कि वह चाहें तो नेशनल हाईवे के लिए बनाए गए एआइ आधारित ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) एप और एनएचएआई के डाटालेक का उपयोग कर सकते हैं। उसके लिए उन्हें केंद्र से तकनीकी परामर्श व स्वीकृति लेकर अपनी सड़कों का डाटा इन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करना होगा। इसके लिए मंत्रालय की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सचिव ने बताया कि राज्यों से यह भी कहा है कि वह चाहें तो केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से यह आकलन भी करा सकता है कि जहां स्थानीय सड़कों पर अधिक दुर्घटनाएं होती हैं, वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास से संबंधित कौन से उपाय किए जा सकते हैं। जैसे कि कहां फ्लाईओवर, अंडरपास, जेब्रा क्रासिंग या फुटपाथ आदि बनाने की आवश्यकता है।
47.8 प्रतिशत हादसे स्थानीय सड़कों पर
उल्लेखनीय है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का यह प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल रोड नेटवर्क में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी 2.14 प्रतिशत, स्टेट हाईवे की 2.94 प्रतिशत और अन्य स्थानीय सड़कों की 94.92 प्रतिशत थी।
वहीं, सड़क हादसों की बात करें तो नेशनल हाईवे पर 31.0 प्रतिशत, स्टेट हाईवे पर 21.2 प्रतिशत और स्थानीय सड़कों पर 47.8 प्रतिशत हादसे हुए। ऐसे में यदि स्थानीय सड़कों पर सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए तो काफी सुधार दिखाई दे सकता है।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026


















