
गैड़ास बुजुर्ग के भरतपुर ग्रिन्ट में जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत ऑनलाइन दावों से अलग है। केंद्र और प्रदेश सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना यहां विफल साबित हो रही है। ऑनलाइन पोर्टल पर इसे लगभग पूर्ण दिखाया गया है, जबकि धरातल पर पानी की टंकी आज भी अधूरी है और पूरा परिसर झाड़ियों से भरा है। पोर्टल पर ‘भरतपुर ग्रिन्ट’ योजना की प्रगति में ट्यूबवेल, पंप हाउस और सोलर का कार्य पूर्ण दर्शाया गया है। वितरण लाइन भी 15 किमी बिछाई जा चुकी बताई गई है। केवल ओएचटी (ओवरहेड टैंक) को ‘कार्य प्रगति पर’ दिखाया गया है। हालांकि, मौके पर ओएचटी का सिर्फ चार पिलर का ढांचा खड़ा है, जिसके सरिये जंग खा रहे हैं। कहीं भी पंप हाउस और सोलर पैनल का नामोनिशान नहीं है। टंकी परिसर में घुटने तक घास उगी है और योजना का सूचना बोर्ड भी जंग खा चुका है। बोर्ड पर योजना की लागत 314.05 लाख रुपये और कार्यदायी फर्म मेसर्स धारा इंफ्रास्ट्रक्शन (जे.वी.) दर्ज है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने बिना काम पूरा किए ही विभाग से मिलीभगत कर भुगतान करा लिया है। पोर्टल पर भी फर्जी प्रगति दर्शाई गई है, जिससे ‘हर घर जल’ का सपना अधूरा रह गया है। इस संबंध में जल निगम के एक्सईएन सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है, इसलिए उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। वहीं, योजना के जेई अतुल गुप्ता से संपर्क करने के कई प्रयास विफल रहे। अधिकारियों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ग्रामीणों में आक्रोश है और उन्होंने जिलाधिकारी से जांच कर कार्रवाई की मांग की है।



























