डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। अब माता-पिता के साथ रहने वाली विधवा और तलाकशुदा बेटियों को उनके परिवार के केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना कार्ड में जोड़ा जा सकेगा।
यह सुविधा मूल सरकारी कर्मचारी या पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद भी उपलब्ध रहेगी, जब कार्ड परिवार पेंशनभोगी जैसे कि जीवित जीवनसाथी के नाम पर हो।
पुराने नियमों में क्या था पेंच?
पहले के नियमों के अनुसार, यदि मूल कार्डधारक कर्मचारी या पेंशनर का निधन हो जाता था और पति या पत्नी को पारिवारिक पेंशन मिलने लगती थी, तो उस कार्ड में किसी नए आश्रित सदस्य को जोड़ने या दोबारा शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं था। इस वजह से कई जरूरतमंद बेटियों को योजना के तहत मुफ्त या रियायती इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
स्वास्थ्य मंत्रालय का यह फैसला उन बुजुर्ग माता-पिता के लिए बड़ी मदद साबित होगा, जो अपनी उन बेटियों की देखभाल कर रहे हैं जिनकी कोई स्वतंत्र आय नहीं है और जिन्हें नियमित इलाज की आवश्यकता है।
मंत्रालय को कई ऐसे पेंशनभोगियों से आवेदन मिले थे, जिन्हें गंभीर बीमारियों से जूझ रही अपनी आश्रित बेटियों के इलाज का खर्च उठाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
क्या है पात्रता और सत्यापन की प्रक्रिया?
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ अपने-आप यानी ऑटोमैटिक लागू नहीं होगा। कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए अधिकारियों द्वारा कुछ जरूरी जांच की जाएगी।
- बेटी की वैवाहिक स्थिति (विधवा या कानूनी रूप से तलाकशुदा होना)।
- उसकी आय और पेंशनभोगी पर पूर्ण निर्भरता का सत्यापन।
- CGHS के तहत लागू अन्य सभी सामान्य शर्तें और नियम पूर्ववत जारी रहेंगे।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 28 अक्टूबर के इस आदेश को केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और CGHS के महानिदेशक को भेज दिया है ताकि इसे तुरंत प्रभाव से लागू किया जा सके।
