‘आदर्श ग्राम’ में चमका उत्तर प्रदेश, दलित बहुल गांवों की बदली तस्वीर; विकास कार्यों में देशभर में आया नंबर-1

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में उजाला फैलाने के संकल्प के साथ चलाई जा रही ‘प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना’ (पीएम-अजय) के अंतर्गत आने वाले ‘आदर्श ग्राम’ घटक को लेकर एक आरटीआइ से बेहद अहम जानकारियां सामने आई हैं।

देश भर में दलित बहुल गांवों के समग्र और एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए चलाई जा रही इस योजना के तहत पिछले चार वर्षों में 22 राज्यों के 13,959 गांवों में कुल 1.74 लाख विकास कार्य चिह्नित किए गए हैं, जिनमें से अब तक 43,802 कार्य सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, देश के विकास पथ पर उत्तर प्रदेश ने सबसे आगे रहते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

अन्य राज्यों का भी प्रदर्शन बेहतर

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने इस मुहिम में सबसे आगे रहते हुए सर्वाधिक 41,949 विकास कार्य चिह्नित किए हैं, जिनमें से 2,282 कार्य पूरे हो चुके हैं और राज्य की औसत पूर्णता दर 5.5 प्रतिशत है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2025-26 के दौरान 2,093 नए गांवों का चयन किया गया और इसी वर्ष 446 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया।

उत्तर प्रदेश के बाद तमिलनाडु में 33,881 कार्य (6,856 पूर्ण) और मध्य प्रदेश में 19,924 कार्य (6,034 पूर्ण) चिह्नित किए गए, जिनकी पूर्णता दर क्रमशः 20.6 प्रतिशत और 34.8 प्रतिशत रही। ओडिशा में 8,642 और कर्नाटक में 6,901 कार्य पूरे हुए।

कुल मिलाकर चार वित्तीय वर्षों में देश भर में 13,459 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया जा चुका है, जिसमें कर्नाटक ने वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक 792 गांवों को यह दर्जा दिलाया। इन गांवों को संवारने का यह सफर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और वंचित समुदायों के जीवन में आत्मसम्मान एवं समृद्धि लाने की एक संवेदनशील पहल है।

चार साल में 917 करोड़ से ज्यादा राशि जारी

आरटीआई के जवाब में ‘आदर्श ग्राम’ घटक के तहत जारी की गई धनराशि का साल-दर-साल विवरण भी दिया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत इन चार वर्षों में कुल ₹917.22 करोड़ की राशि जारी की गई है। 2022-23 में 51.62 करोड़ रुपये जारी किए गए; 2023-24 में 236.3 करोड़ रुपये मंजूर किए गए; 2024-25 में 326.1 करोड़ रुपये आवंटित किए गए; और 2025-26 में 303.2 करोड़ रुपये दिए गए।

बुनियादी ढांचे से आजीविका तक का पैमाना

इस योजना के तहत वे गांव पात्र होते हैं जहां अनुसूचित जाति की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक और कुल आबादी कम से कम 500 हो। चुने गए गांवों का विकास पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सामाजिक सुरक्षा, सड़कें, आवास, बिजली, कृषि, वित्तीय समावेशन और आजीविका कौशल जैसे 10 क्षेत्रों के 50 निगरानी योग्य संकेतकों के आधार पर परखा जाता है।

किसी गांव को ‘आदर्श ग्राम’ तब घोषित किया जाता है जब वह निर्धारित पैमानों पर 100 में से कम से कम 70 अंक हासिल कर लेता है और ‘खुले में शौच मुक्त’ हो जाता है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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