बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में बाबा निहाल दास की समाधि सरयू नदी की धारा में विलीन हो गई। उनकी कुटी पीढ़ियों से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां हर मंगलवार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले और खास मौकों पर भीड़ जुटती है। स्थानीय निवासी बागीश कुमार पांडेय ने बताया कि उनके बुजुर्ग बचपन में बाबा निहाल दास से जुड़ा एक प्रसंग सुनाते थे। उनके मुताबिक, बाबा को अपने देहावसान का आभास हुआ तो उन्होंने लोगों से कहा था कि उनके जाने के बाद इसी जगह समाधि बनाई जाए। बागीश कुमार के अनुसार, बाबा ने यह भी कहा था कि जब सरयू मैया की इच्छा होगी, वह उन्हें अपनी धारा में समाहित कर लेंगी। बाद में नदी का पानी वहां पहुंचा और समाधि धारा में विलीन हो गई। स्थानीय लोग आज भी इस प्रसंग को बाबा की महिमा से जुड़ी लोकमान्यता के रूप में सुनाते हैं। कुटी पर दर्शन करने पहुंचे झिनकू लाल, बीरबल सिंह और बृजेश सिंह ने बताया कि क्षेत्र के लोगों की बाबा निहाल दास में गहरी आस्था है। उनके अनुसार, हर मंगलवार श्रद्धालु यहां आते हैं और मेले के दौरान भीड़ जुटती है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। क्षेत्र के लोग बाबा निहाल दास को संत पुरुष के रूप में याद करते हैं। उनसे जुड़ी कथाएं बुजुर्गों से नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।
सरयू की धारा में बाबा निहाल दास की समाधि-विलीन हुई:बस्ती के कप्तानगंज की कुटी पर हर मंगलवार पहुंचते हैं श्रद्धालु
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