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महा घोटाला : मंगल पांडे काल में शुरू हुआ भ्रष्टाचार निशांत में बदस्तूर जारी

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स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से 13 हज़ार की नौकरी करने वाला डाटा ऑपरेटर 300 करोड़ का बना मालिक 
 
रवीश कुमार मणि 
 
पटना, 29 सितंबर ( तरूणमित्र ) । लालू यादव के लालटेन युग के बाद नीतीश के सुशासन राज में बिजली व्यवस्था में व्यापक सुधार को विकास का नाम देकर प्रचार- प्रसार किया गया । आम लोग मानते ही नहीं बल्कि ऐसा महसूस भी करते हैं की बिजली की आँख- मिचौली ख़त्म हुई है और गांव- गांव तक जगमग हुआ । चुनावी आम सभा में नीतीश के नेता ऐसा बोलते थे की क्या जी जनरेटर से मोबाइल तो चार्ज नहीं न कर रहे हैं । यह नीतीश सरकार है सीधे मोबाइल को बिजली के प्लग में डालिए । 20 घंटा सुचारू रूप से बिजली रह रहा है न , आम लोग ज़ोरदार तालियों से स्वागत करते नीतीश कुमार की जयकार लगाते नहीं थक रहे थे । वहीं बिहार सरकार का स्वास्थ्य विभाग सुचारू बिजली व्यवस्था को सीधे ख़ारिज कर वर्ष 2024 में माना की सरकारी अस्पताल में बिजली ( विद्युत ) व्यवस्था सही नहीं रहता है , जनरेटर पर आश्रित होना ही मात्र एक विकल्प है । सरकारी अस्पतालों में जनरेटर व्यवस्था से निर्बाध बिजली के लिए नये सिरे से टेंडर करने का निर्णय लिया । सभी ज़िला जनरेटर के टेंडर में जुट गयी । पटना जिला स्वास्थ्य समिति ने पत्रांक 1325 दिनांक 16/09/2024 को टेंडर प्रकाशित किया । इसमें पीएचसी, रेफरल जिला अस्पताल को प्रति माह फ़िक्स रेट पर जनरेटर का प्रावधान बनाया गया । इसमें 6 कंपनियों ने भाग लिया जिसमें मात्र दो कंपनियों को योग्य पाया गया । इसका उल्लेख पत्रांक 1543 दिनांक 25/10/24  के निर्गत पत्र में उल्लेख है । तीन सालों के लिए दो में से एक किसी को चयनित किया गया । वर्ष 2025 के पूर्व जिला के पीएचसी में 87 रूपए प्रति घंटा के दर से जो जनरेटर चलता था , अगर एक दिन में 8 घंटा भी बिजली नहीं रहती थी तो प्रतिदिन 696 रूपए के हिसाब से प्रति माह अधिकतम 20 हज़ार 880 रूपए का जनरेटर बिल उचित मानने में कोई हर्ज नहीं लेकिन उसमें भी काफ़ी झोल- झाल कर नीतीश के निर्बाध बिजली व्यवस्था को स्वास्थ्य विभाग ने लालटेन युग बताने में कोई कसर नहीं छोड़ा । 21 हज़ार रूपए में जहां जनरेटर से काम चल रहा था वहीं तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने जनरेटर युग का विकास के प्रति माह 60 हज़ार रूपए पीएचसी के लिए निर्धारित किया वहीं रेफरल और जिला अस्पताल को 1.5 लाख से 2.5 लाख तक फिक्स कर दिया और सभी ज़िलों में भ्रष्टाचार का खेल खेला गया । मंगल पांडे के मंत्री काल में जनरेटर टेंडर में महा घोटाले से हुए भ्रष्टाचार का खेल स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार में भी बदस्तूर जारी है । 
 
दो कंपनियों को साउथ बिहार के सभी ज़िलों की दे दी गयी टेंडर, अधिकांश जनरेटर का पीयूसीसी फ़ेल 
 
स्वास्थ्य विभाग ने जनरेटर महा घोटाला को अंजाम तो दिया ही, साउथ बिहार के सभी ज़िलों में दो कंपनियों पर मेहरबानी दिखा सीधे तौर पर अलग से उपहार भी लिया होगा । 18 ज़िलों को पीएचसी, रेफरल, जिला अस्पताल का टेंडर दो कंपनियों को दे दी गयी । इसमें एक कंपनी नालंदा ज़िले का है तो वहीं दूसरा का कार्यालय पटना जिला दिखा रहा है जबकि इसके मालिक जहानाबाद ज़िले के बताएं जाते है । जिन दो कंपनियों को जनरेटर का टेंडर दिया गया है उसमें कभी यह नहीं मांगा गया की आपके पास कितने जनरेटर है , कहां से जनरेटर की ख़रीद की गई है । मानक के अनुकूल है की नहीं । कुछ लोग ऐसा बताएँ की अस्पतालों में लगे जनरेटर का पीयूसीसी ( प्रदूषण) फ़ेल है और काफ़ी पुराना है । जिन दो कंपनियों को तीन वर्षों के लिए जनरेटर का टेंडर दिया गया है वह 2024 के पूर्व चला रहे पीएचसी अस्पतालों में जनरेटर मालिकों को 87 रूपए से भी कम कर पेटी काँट्रेक्ट पर दे दिया है और बताया गया है की बिजली अच्छी रहती है । जब टेंडर लेने वाले को ऐसा पता है की सूबे में बिजली अच्छी रहती है तो स्वास्थ्य विभाग ने लालटेन युग साबित करते हुए जनरेटर का टेंडर वास्तविक से दोगुना- तिगुना पर क्यों किया । 
 
13 हज़ार की नौकरी करने वाला डाटा ऑपरेटर, स्वास्थ्य विभाग के मेहरबानी से 300 करोड़ का मालिक 
 
दक्षिण बिहार के अस्पतालों में सेवा देने वाली दो कंपनियों का दबदबा क़ायम है । जनरेटर, लाउंड्री, साफ़ – सफ़ाई आदि टेंडर पर इनका क़ब्ज़ा है । इन दो कंपनियों में एक का मालिक 10-12 वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग में डाटा ऑपरेटर का काम करता था और 13 हज़ार रूपए पाता था । ऐसा बताया जाता है की एक साहब के कहने पर डाटा ऑपरेटर की नौकरी को तौबा- तौबा कहं दिया । फिर साहब के मेहरबानी से दिन दोगुना और रात चौगुना तरक़्क़ी करते हुए 300 करोड़ का मालिक बन गया है । 

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