
विक्रमजोत और रूपगढ़ क्षेत्र में बुधवार को हलषष्ठी (ललही छठ) पर्व मनाया गया। इस दौरान माताओं ने अपने बेटों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखा। उन्होंने पूरी श्रद्धा से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने परंपरा के अनुसार भगवान बलराम की पूजा की। हलषष्ठी को हल छठ, हरछठ और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मां की ममता और संतान के प्रति प्रेम का प्रतीक है। इस पर्व का संबंध खेती और प्रकृति से भी जुड़ा है। कई जगहों पर महिलाएं हल से जुती जमीन में पैदा होने वाले अनाज का सेवन नहीं करती हैं। वे तिन्नी के चावल और महुआ आदि का इस्तेमाल करती हैं। पूरे दिन क्षेत्र में हलषष्ठी पर्व को लेकर भक्तिमय माहौल रहा। रूपगढ़ के हनुमान मंदिर और देवकली मंदिर पर पूजा के साथ महिलाएं दर्शन के लिए भी पहुंचीं।
































