डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने मंत्रालयों और विभागों के सचिवों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें जिन्हें वापस लिया जा सकता है।
यह कदम जन विश्वास अधिनियम के तहत कई अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाने और पुराने पड़ चुके कानूनी प्रावधानों को खत्म करने के बाद उठाया गया है। उन्हें इस महीने के अंत तक यह काम पूरा करने के लिए कहा गया है।
सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?
यह कदम सरकार के उस प्रयास का हिस्सा है, जिसका मकसद कानूनी मुकदमों के बोझ को कम करना और ऐसे मामलों को आगे न बढ़ाना है, जो कानूनी ढांचे में बदलाव के बाद अब अप्रासंगिक हो गए हैं। इस समीक्षा में वे मामले शामिल होंगे, जो किसी कानून में हुए संशोधन या अन्य कानूनी सुधारों से प्रभावित हुए हैं।
कितने मामले लंबित हैं?
फिलहाल, केंद्र सरकार से जुड़े 3.5 लाख से अधिक मामले पांच साल से भी ज्यादा समय से लंबित हैं। इनमें 19 उच्च न्यायालयों में चल रहे एक लाख से अधिक पुराने (लेगेसी) मामले भी शामिल हैं।
एक प्रेजेंटेशन के अनुसार, राजस्व विभाग में 5 साल से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या सबसे अधिक (1.27 लाख) है। इसके बाद रेलवे (45,583), सैन्य मामलों के विभाग (32,464), श्रम और रोजगार मंत्रालय (28,822) और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (27,109) का नंबर आता है।
अधिकारियों ने बताया कि सड़क परिवहन, रक्षा और दूरसंचार जैसे कुछ मंत्रालयों में लंबित मामलों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन इन मुकदमों से जुड़े वित्तीय परिणाम काफी बड़े हो सकते हैं।
जन विश्वास कानूनों के तहत 2023 और 2026 में हुए दो चरणों में विभिन्न केंद्रीय कानूनों की कई धाराओं को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है और अनुपालन प्रावधानों को शामिल करके उन्हें तर्कसंगत बनाया गया है।
लॉन्च किया जाएगा पोर्टल
सभी सचिवों की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सोमनाथन ने उन्हें बताया कि नवंबर में एक समर्पित मुकदमा प्रबंधन पोर्टल लॉन्च किया जाएगा। इसका उद्देश्य मुकदमा प्रबंधन सेल के कामकाज की निगरानी करना, पुराने मुकदमों और अपीलों की समीक्षा करना, मध्यस्थता और मामलों की स्क्रीनिंग करना है। मंत्रालयों और विभागों को नियमित रूप से मामलों की स्थिति अपडेट करनी होगी।












