प्राइवेसी एक्ट में हो सकता है संशोधन, सरकार ने दिए संकेत; आईटी मंत्रालय बोला- जरूरत पड़ी तो रद करेंगे

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के नियमों में बदलाव करने के लिए तैयार है। अगर जरूरत पड़ी तो कानून में भी बदलाव किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसके लागू होने से पत्रकारों और मीडिया हाउसों के काम में कोई रुकावट न आए।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कानून के वे हिस्से, जिन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देने वाले संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला बताया जा रहा है वे डेटा फिड्यूशियरी (डेटा रखने और नियंत्रित करने वाली संस्थाओं) पर लागू होते हैं न कि पत्रकारों पर।

पत्रकार और मीडिया हाउस इस कानून के दायरे में नहीं

अधिकारियों ने कहा, “यह कानून केवल डेटा फिड्यूशियरी पर लागू होता है यानी वे लोग या संस्थाएं जो डेटा रखती हैं और उसे नियंत्रित करती हैं। पत्रकार और मीडिया हाउस इस श्रेणी में नहीं आते हैं।”

जरूरत पड़ने पर संशोधन भी संभव

जब उन्हें पत्रकारों की इस चिंता के बारे में बताया गया कि डीपीडीपी एक्ट में मीडिया हाउसों को स्पष्ट रूप से छूट नहीं दी गई है तो उन्होंने कहा, “इस संबंध में किसी भी चिंता को दूर करने के लिए नियमों में हमेशा संशोधन किया जा सकता है। नियमों की शक्ति भी कानून के बराबर ही होती है। यदि आवश्यक हुआ तो हम कानून में बदलाव करने के लिए एक कदम और आगे भी जा सकते हैं।”

डीपडीपी एक्ट को नागरिकों के निजता के अधिकार, डेटा की सुरक्षा की आवश्यकता और डेटा फिड्यूशियरी (डेटा रखने वाली संस्थाओं) पर जिम्मेदारियां तय करने के आधार पर सही ठहराया गया है।

क्या है मामला?

केंद्र की यह प्रतिक्रिया तब आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) की एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। डीएनपीए भारत के 21 प्रमुख न्यूज मीडिया संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है और इसने इस कानून तथा इसके तहत बने नियमों के कई प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी है।

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और इससे पत्रकारिता से जुड़ी सभी तरह की गतिविधियों पर खतरा पैदा होता है।

मंत्रालय ने क्या कहा?

अधिकारियों ने कहा कि डीपीडीपी एक्ट के पत्रकारों के लिए रुकावट बनने की चिंता को दूर किया जाएगा। इसके लिए नियमों में और जरूरत पड़ने पर खुद कानून में ही उनके लिए छूट का प्रावधान किया जाएगा।

सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि डीपीडीपी अधिनियम की धारा 7 बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और बीमा कंपनियों जैसे डेटा फिड्यूशियरी के लिए है और मीडिया इसके दायरे में नहीं आता है।

उन्होंने कहा, “यह सरकार संविधान द्वारा गारंटीकृत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकारों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”

धारा 7 में कहा गया है कि डेटा प्रिंसिपल के व्यक्तिगत डेटा को डेटा फिड्यूशियरी द्वारा (a) उस विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्रोसेस किया जा सकता है, जिसके लिए डेटा प्रिंसिपल ने स्वेच्छा से अपना व्यक्तिगत डेटा दिया है और जिसके संबंध में उसने यह नहीं बताया है कि वह अपने व्यक्तिगत डेटा के उपयोग के लिए सहमति नहीं देती है।

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