एफआईआर वापस लेने और लंबित भुगतान की मांग को लेकर आशा कर्मियों ने जिला मुख्यालय पर पैदल मार्च किया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) ने प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल के जरिए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मजदूर नेताओं पर दर्ज एफआईआर वापस लेने, आशा कर्मियों का कथित उत्पीड़न बंद करने और स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में बनी सहमतियां लागू करने की मांग की। यूनियन ने कहा कि आशा कर्मियों और मजदूर नेताओं के खिलाफ कार्रवाई से कर्मचारियों में नाराजगी है। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और इको गार्डन के अंदर-बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की सार्वजनिक जांच कराने की मांग की। संगठन के मुताबिक, 7 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में आशा कर्मियों की 13 मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बाद हड़ताल खत्म की गई, लेकिन सहमतियां अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुईं। इन्हें लागू कराने के लिए 23 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में कार्यक्रम हुआ था। आशा कर्मियों ने बकाया प्रोत्साहन राशि, लंबित पीएलआई और अन्य मदों का भुगतान दीपावली से पहले करने की मांग की। उन्होंने राज्य वित्त से मिलने वाले अंशदान में 4,500 रुपये और प्रोत्साहन राशि में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग भी रखी। यूनियन ने मातृत्व अवकाश, साप्ताहिक अवकाश और त्योहारों पर छुट्टी देने की मांग की। प्रदेश के सभी ब्लॉकों में आशा संगिनी और एएनएम के काम के लिए अलग कक्ष या पंचायत भवनों में वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी की गई। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष संगीता, कुसमाती, पूनम सिंह, मीरा देवी, मनोरमा देवी, कुमारी उषा देवी, शकुंतला, लक्ष्मी मद्धेशिया और माधुरी देवी सहित आशा कर्मी मौजूद रहीं।
आशा कर्मियों ने एफआईआर वापस लेने की मांग की:महराजगंज में पैदल मार्च कर लंबित भुगतान और सहमतियां लागू करने का ज्ञापन सौंपा
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