
देश के पांच राज्यों में हुई साइबर ठगी की शिकायतों की जांच में बलरामपुर से जुड़े एक म्यूल बैंक खाते का खुलासा हुआ है। इस खाते ने साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क की परतें खोली हैं। साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने खाते की जांच की। जांच में पता चला कि छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, कर्नाटक, दिल्ली और गुजरात में दर्ज आठ साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन इसी खाते से हुए हैं। मामले में बैंक खाताधारक समेत तीन लोगों की भूमिका सामने आई है। इसके बाद कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ ने म्यूल बैंक खाता संख्या 31603240016383 की जांच के निर्देश दिए थे। पुलिस अधीक्षक के कहने पर खाते की जानकारी समन्वय पोर्टल (JMIS) पर जांची गई। जांच में सामने आया कि इस खाते से ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी आठ शिकायतों में संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इन शिकायतों में छत्तीसगढ़ के मुंगेली थाने में 60,200 रुपये, तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले के कूवाथुर थाने में 2,85,600 रुपये और कर्नाटक के बेंगलुरु सिटी स्थित व्हाइटफील्ड सेंट्रल क्राइम थाने में 67,000 और 56,400 रुपये से जुड़े मामले शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट साइबर पुलिस स्टेशन, गुजरात के गांधीनगर सेक्टर-7 थाना और कर्नाटक के बेल्लंदूर थाने की शिकायतों का संबंध भी इसी खाते से पाया गया। जांच में साइबर ठगी का तरीका भी सामने आया है। आरोपी व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए लोगों से संपर्क करते थे। वे उन्हें गूगल मैप पर रिव्यू देने जैसे आसान ऑनलाइन टास्क पूरे कर पैसे कमाने का लालच देते थे। शुरुआत में पीड़ितों को 200 से 400 रुपये तक का छोटा भुगतान किया जाता था। इससे उनका भरोसा जीतने के बाद उन्हें ज्यादा कमाई के लिए निवेश करने को कहा जाता था। इसके बाद अलग-अलग बहानों से उनसे बड़ी रकम जमा कराकर ठगी की जाती थी। बैंक स्टेटमेंट की जांच में पुलिस को 5 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 के बीच खाते में कुल 1,68,763 रुपये जमा होने की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, खाते में हुए लेनदेन का संबंध साइबर ठगी की दर्ज शिकायतों से पाया गया है। जांच में सामने आया कि आठ शिकायतों के जरिए इसी खाते का इस्तेमाल कर 82,932 रुपये की साइबर ठगी की गई थी।








































