भारत में ब्लूबेरी का आयात भले ही सीमित है, लेकिन मांग तेजी से बढ़ रही है। RaboResearch की ब्लूबेरी अपडेट 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत आने वाले वर्षों में एशिया का सबसे बड़ा संभावित ब्लूबेरी बाजार बन सकता है। रिपोर्ट कहती है कि चीन पहले ही ब्लूबेरी के उत्पादन और खपत दोनों में बड़ा विस्तार दिखा चुका है, जबकि भारत, थाईलैंड, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों में भी मांग लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ब्लूबेरी का अभी बेहद सीमित आयात होता है, लेकिन वृद्धि की गति उल्लेखनीय है। मांग को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए टार्गेटेड मार्केटिंग और उच्च गुणवत्ता बेहद आवश्यक होगी।
एशिया में ब्लूबेरी की मांग, भारत सबसे आगे
RaboResearch का कहना है कि एशियाई बाजारों में ब्लूबेरी की मांग तेजी से बढ़नी शुरू हो गई है। विशेष रूप से भारत को 87,000 टन की अनुमानित क्षमता के साथ सबसे बड़ा उभरता हुआ बाजार बताया गया है।
एशिया के अन्य संभावित बाजार
इंडोनेशिया
जापान
तुर्किये
वियतनाम
थाईलैंड
रिपोर्ट का कहना है कि वैश्विक निर्यातक अब अमेरिका और यूरोप से आगे बढ़कर एशिया को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां एशिया में ब्लूबेरी की खेती और ब्रीडिंग में निवेश कर रही हैं, क्योंकि यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर वृद्धि की क्षमता रखता है।
अमेरिका और यूरोप में बनी मजबूत मांग
वैश्विक स्तर पर ब्लूबेरी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
अमेरिका में प्रति व्यक्ति खपत 1.3 किलो से अधिक हो चुकी है और यह बढ़ती जा रही है।
यूरोप में मांग स्थिर है, हालांकि कीमतों में अस्थिरता और रसद चुनौतियां बनी हुई हैं।
RaboResearch के सीनियर एनालिस्ट डेविड मगान्या के अनुसार, ब्लूबेरी की मांग अन्य फलों की तुलना में तेज़ी से बढ़ रही है। “हेल्दी स्नैकिंग” के बढ़ते ट्रेंड से भविष्य में सेल और बढ़ने की उम्मीद है।
वैश्विक आपूर्ति तेजी से बढ़ते हुए विविध हो रही
मगान्या ने बताया कि वैश्विक ब्लूबेरी उत्पादन अब कई क्षेत्रों में फैल गया है। पेरू दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। मोरक्को अफ्रीका में तेज गति से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही चिली व कनाडा को पीछे छोड़ सकता है। अमेरिका में उत्पादन स्थिर है। कनाडा की उत्पादन गतिविधि संतुलित हो गई है। मेक्सिको लागत दक्षता के दबाव का सामना कर रहा है। चीन सबसे बड़ा उत्पादक है और अब निर्यात भी शुरू कर चुका है। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रतिस्पर्धा का आधार स्केल, जेनेटिक्स और लॉजिस्टिक्स होगा। निर्माताओं व निर्यातकों को गुणवत्ता और रणनीतिक मार्केटिंग पर ध्यान देना होगा
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि उभरते बाजारों खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बिक्री बढ़ाने के लिए उत्पादकों को:
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए होमगार्ड स्वयंसेवकों की व्यापक भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने मंगलवार से 41,424 रिक्त पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आवेदन की अंतिम तिथि 17 दिसंबर निर्धारित की गई है।
भर्ती बोर्ड के अनुसार आवेदन करने से पहले वन टाइम रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य बनाया गया है। इस प्रक्रिया की शुरुआत 3 नवंबर को ही की जा चुकी थी और तब से अब तक एक लाख से अधिक अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं।
चयन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी
ऑनलाइन आवेदन पूरा होने के बाद उम्मीदवारों को सौ अंकों की ओएमआर आधारित लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा, जिसकी अवधि दो घंटे होगी। इसके बाद योग्य अभ्यर्थियों का शारीरिक मानक परीक्षण, दस्तावेजों की जांच और फिर शारीरिक दक्षता परीक्षा कराई जाएगी। अंत में, जिला स्तर पर उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार मेरिट सूची जारी होगी। प्रत्येक उम्मीदवार अपने जिले में खाली पदों के आधार पर ही आवेदन कर सकेगा।
आरक्षण, शुल्क और अतिरिक्त अंक
पुरुषों और महिलाओं दोनों को आवेदन की अनुमति है। महिलाओं के लिए बीस फीसद आरक्षण तय किया गया है। आवेदन शुल्क सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए चार सौ रुपये रखा गया है, जबकि एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को तीन सौ रुपये जमा करने होंगे।
कई श्रेणियों में अतिरिक्त अंक भी जोड़े जाएंगे। एनसीसी प्रमाणपत्र वालों को एक से तीन अंक, आपदा मित्र प्रमाणपत्र वालों को तीन अंक और चार पहिया वाहन लाइसेंस रखने वाले अभ्यर्थियों को एक अंक अतिरिक्त दिया जाएगा।
ड्यूटी भत्ता और आवश्यक शर्तें
ड्यूटी पर तैनाती होने पर चयनित स्वयंसेवकों को फिलहाल रोजाना छह सौ रुपये का भत्ता दिया जाता है। इसके साथ राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर महंगाई भत्ता भी जोड़ा जाता है।
भर्ती के लिए अभ्यर्थी उसी जिले का मूल निवासी होना चाहिए, जिसकी रिक्ति के लिए आवेदन किया जा रहा है। किसी सरकारी या अर्द्धसरकारी सेवा में नियमित रूप से कार्यरत व्यक्ति आवेदन के पात्र नहीं होंगे।
कानपुर नगर में 1947, लखनऊ में 1371, आगरा में 1232, प्रयागराज में 1219, हरदोई में 1072 और वाराणसी में 1004 पद रिक्त हैं।
अन्य कई जिलों में 800 से 900 के बीच सीटें उपलब्ध हैं।
सुविधा के लिए हेल्पलाइन
आवेदन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए भर्ती बोर्ड ने 18009110005 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जो अंतिम तिथि तक सक्रिय रहेगा।
मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सीएम मोहन यादव ने देवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के लगभग 1.33 लाख किसानों के बैंक खातों में भावांतर भुगतान योजना की राशि सीधे ट्रांसफर कर दी है।
सोयाबीन किसानों को मिली घाटे की भरपाई
सरकार ने यह कदम सोयाबीन उत्पादक किसानों को बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उठाया है। इस योजना के तहत, मुख्यमंत्री ने किसानों को 1300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 233 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
भावांतर राशि तय करने के लिए सरकार ने 2025 के लिए 4130 रुपये प्रति क्विंटल का मॉडल रेट तय किया है। यह रेट उन किसानों पर लागू होता है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की फसल को मंडी परिसरों में बेचा है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मॉडल रेट में लगातार वृद्धि देखी गई है। इससे पहले, 7 नवंबर को मॉडल रेट 4020 रुपये था, जो बढ़कर 12 नवंबर तक 4077 रुपये प्रति क्विंटल हो गया था।
घर बैठे चेक करें
जिन किसानों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है, वे आसानी से अपना पेमेंट स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
सबसे पहले मध्य प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
वहां योजना अनुभाग में जाकर भावांतर योजना से संबंधित लिंक पर क्लिक करें।
अपना रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें और लॉगिन करें।
लॉगिन करने के बाद आप अपनी भुगतान की स्थिति और अन्य सभी विवरण देख सकते हैं।
अजय कुमार, लखनऊ. मुंबई की राजनीति में वह क्षण एक बार फिर सामने है, जब चुनाव सिर्फ एक स्थानीय निकाय का नहीं, बल्कि पूरे राज्य की दिशा तय करने वाला माना जाता है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित चुनावों को लेकर इस बार सबसे बड़ा राजनीतिक धमाका तब हुआ, जब कांग्रेस ने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) में बने रहने के बावजूद अकेले चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय ले लिया. यह फैसला जितना साहसिक दिखाई देता है, उतना ही यह संकेतों और संदेशों से भरा हुआ भी है. मुंबई जैसे आर्थिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली शहर में जहां हर सीट का महत्व है, वहां कांग्रेस का यह कदम पूरी राजनीति की रफ़्तार बदल सकता है. मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ और संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने यह मांग लंबे समय से उठाई थी कि पार्टी को बीएमसी जैसे विशाल मंच पर अपनी स्वयं की पहचान को सामने रखना चाहिए. पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन राजनीति ने कांग्रेस के लिए उम्मीद से कम परिणाम दिए, विशेषकर स्थानीय निकायों में. वर्ष 2017 के बीएमसी चुनाव में कांग्रेस 31 सीटें लेकर तीसरे स्थान पर रही थी, जबकि भाजपा 82 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. लेकिन इस बार समीकरण बिल्कुल बदल चुके हैं और यही कारण है कि कांग्रेस ने यह दांव खेला है. पार्टी के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने भी स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय इकाई ने जबरदस्त उत्साह से यह मांग की, और नेतृत्व ने उनका मत स्वीकार किया.
कांग्रेस का यह फैसला यूं ही नहीं हुआ. बिहार विधानसभा चुनावों में जिस तरह गठबंधन का हिस्सा होकर कांग्रेस को उम्मीद से कम सीटें मिलीं, उससे पार्टी कार्यकर्ताओं में यह विश्वास पैदा हुआ कि स्वतंत्र लड़ाई अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है. कई विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अगर बिहार में अकेले लड़ती, तो वह कम से कम छह सीटें जीत सकती थी और उसका वोट प्रतिशत 12 से 14 प्रतिशत तक जा सकता था. लेकिन गठबंधन की मजबूरी ने कांग्रेस को वह अवसर नहीं दिया. कार्यकर्ताओं और जमीनी नेताओं का उत्साह लगातार घट रहा था, और यही हताशा मुंबई में बड़े बदलाव का कारण बनी.मुंबई में कांग्रेस की स्थिति बिहार जितनी कमजोर नहीं है. यहां उसका परंपरागत वोट बैंक अभी भी काफी स्थिर है मुस्लिम वोटर लगभग 20–22 प्रतिशत, दलित 10–12 प्रतिशत और दक्षिण भारतीय समुदाय 8–10 प्रतिशत. यह तीनों समूह लंबे समय से कांग्रेस के कोर सपोर्टर रहे हैं. 2017 के चुनावों में जिन इलाकों में मुस्लिम बहुलता थी, वहां कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया था. आज भी मुंबई के दक्षिण और मध्य इलाकों तथा बांद्रा, अंधेरी, वर्ली जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन मजबूत माना जाता है. यही नहीं, पार्टी ने हाल के वर्षों में 50,000 से अधिक नए सदस्य जोड़े हैं और 1000 से अधिक टिकट आवेदन प्राप्त हुए हैं. यह संगठनात्मक ऊर्जा कांग्रेस को अकेले मैदान में उतरने का आत्मविश्वास देती है.
लेकिन कांग्रेस की इस चाल के पीछे सिर्फ आत्मविश्वास ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति भी है. पार्टी को सबसे अधिक असहजता एमएनएस से बढ़ती नज़दीकियों को लेकर थी. जब उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच हाल के महीनों में सहयोग के संकेत मिले मतदाता सूची में गड़बड़ियों के विरोध में हुई संयुक्त रैली इसका उदाहरण है तो कांग्रेस की चिंता गहराने लगी. राज ठाकरे की राजनीति पर कांग्रेस हमेशा सवाल उठाती रही है, खासकर ‘मराठी मानूस’ और प्रवासी-विरोधी अभियानों के कारण. वर्षा गायकवाड़ ने खुलकर कहा कि कांग्रेस कभी भी एमएनएस के साथ हाथ नहीं मिला सकती. यदि यह गठबंधन और मजबूत होता, तो न सिर्फ कांग्रेस को कम सीटें मिलतीं बल्कि उसका सेक्युलर वोट बैंक भी बिखर सकता था.उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले पर कहा कि हर दल को अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता है और शिवसेना (यूबीटी ) भी उसी तरह स्वतंत्र है. यह बयान दिखाता है कि एमवीए में सतही शांति के बावजूद अंदरूनी तनाव मौजूद है. कांग्रेस का मानना है कि यदि शिवसेना और एमएनएस मिलकर एक मजबूत मराठी फ्रंट बनाते हैं, तो कांग्रेस को सिर्फ 50–60 सीटें मिल सकती थीं, जबकि वह कम से कम 100 से अधिक सीटों पर लड़ने का दावा रखती है. कांग्रेस को यह भी आशंका है कि ‘मराठी बनाम अन्य’ की राजनीति में वह ‘आउटसाइडर’ बन जाएगी, जिससे उसके कोर वोटर्स दूर हो सकते हैं.
कांग्रेस की रणनीति में यह पहलू बेहद महत्वपूर्ण है कि अकेले लड़ने से उसे मुस्लिम और दक्षिण भारतीय वोटों का और अधिक एकजुट समर्थन मिल सकता है. एमएनएस के साथ शिवसेना की नजदीकी बढ़ने से मुस्लिम वोटर असहज हो सकते थे, और कांग्रेस इसी भावना का लाभ उठाकर स्वयं को एकमात्र मजबूत सेक्युलर विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है. यह कांग्रेस के लिए सिर्फ वोटों की राजनीति नहीं, बल्कि अपनी वैचारिक स्थिति का भी बयान है.हालांकि इस फैसले से सबसे अधिक लाभ भाजपा को होने की आशंका है. भाजपा 2017 से अब तक बीएमसी में सबसे बड़ी ताकत रही है. यदि विपक्ष विभाजित होकर लड़ता है, तो भाजपा को बहुत फायदा मिल सकता है. लेकिन कांग्रेस का तर्क है कि ‘कब तक हम अपनी कीमत पर दूसरों का फायदा कराते रहेंगे?’ पार्टी का मानना है कि एमवीए में उसकी भूमिका लगातार छोटी होती जा रही थी, और अब उसे अपनी ताकत और कमजोरी का आकलन खुद करना होगा.मुंबई कांग्रेस के दो लाख से अधिक सक्रिय कार्यकर्ता, वर्षों से सड़कों पर सक्रिय पार्षद और मजबूत बूथ संरचना कांग्रेस के फैसले को वजन देती है. यह सिर्फ चुनाव लड़ने का नहीं, बल्कि अपना खोया हुआ राजनीतिक आधार पुनः हासिल करने का मौका है. मुंबई जैसे शहर में जहां हर समुदाय की राजनीतिक समझ अलग होती है, कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इस विविधता के भीतर अपनी जगह दोबारा बनाए. लेकिन अगर उसका वोट बैंक एकजुट हो गया, तो अकेले लड़ने का यह दांव उसके लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है.
बहरहाल, यह फैसला कांग्रेस के लिए जोखिम और अवसर दोनों लेकर आया है. मुंबई की बीएमसी का बजट 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है देश की किसी भी नगरपालिका से बड़ा. यहां की राजनीति सिर्फ वार्डों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय राजनीति तक असर डालती है. कांग्रेस ने इस चुनाव में अपने भविष्य को दांव पर लगा दिया है. अगर यह दांव सफल रहा, तो महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की वापसी की कहानी लिखी जाएगी; लेकिन अगर यह असफल हुआ, तो पार्टी को गहरे संगठनात्मक पुनर्विचार की जरूरत पड़ेगी.मुंबई की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है एक तरफ शिवसेना का अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष, दूसरी तरफ भाजपा की आक्रामक रणनीति, और अब कांग्रेस का अपने पैरों पर खड़े होने का ऐलान. यह चुनाव सिर्फ एक निकाय का नहीं, बल्कि मुंबई की पहचान, उसकी राजनीति, और महाराष्ट्र की सत्ता संतुलन का भी फैसला करेगा. कांग्रेस ने अपनी चाल चल दी है, अब जनता की बारी है कि वह तय करें कि क्या यह आत्मविश्वास मुंबई में नई राजनीति का द्वार खोलेगा या फिर विपक्ष को और ज्यादा विभाजित कर देगा.
बिहार चुनाव–2025 के बाद उठे सियासी विवादों के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस का फोकस अचानक एक पुराने नाम पर जा टिका है—रमीज खान। रोहिणी आचार्य के गंभीर आरोप सामने आने के बाद यूपी के डीजीपी कार्यालय ने बिना देर किए संबंधित जिलों से उनकी पूरी आपराधिक पृष्ठभूमि की विस्तृत रिपोर्ट मांग ली। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई सिर्फ रूटीन पूछताछ नहीं, बल्कि एक बड़े स्तर पर शुरू हुई जांच का पहला कदम है।
कौशाम्बी पुलिस ने खोली फाइलें
डीजीपी मुख्यालय के निर्देश पर कौशाम्बी पुलिस ने रातोंरात केस फाइलें खंगालीं। रिपोर्ट में साफ हुआ कि रमीज खान के खिलाफ कोखराज थाना में दो गंभीर मामले दर्ज हैं। इनमें एक हत्या का केस भी शामिल है, जिसमें उन पर प्रतापगढ़ के प्रॉपर्टी डीलर शकील की हत्या कर शव को सड़क किनारे फेंकने का आरोप है। फरार रहने के दौरान उन पर दूसरा केस भी दर्ज किया गया था। 2023 में यूपी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी कार्यालय ने केवल पुराने मामलों की पुष्टि भर नहीं की, बल्कि यह भी जांच शुरू कर दी है कि क्या रमीज खान पर लगे राजनीतिक और सांप्रदायिक प्रचार से जुड़े आरोपों का कोई डिजिटल या जमीनी आधार है। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि बिहार चुनाव के दौरान चली संभावित “हेट कैंपेनिंग” में यूपी के युवाओं को शामिल करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
भेजी गई रिपोर्ट
एएसपी राजेश कुमार ने पुष्टि की कि डीजीपी मुख्यालय के आदेश पर कोखराज में दर्ज दोनों मामलों की विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि जरूरत पड़ने पर और भी जिलों से सूचनाएँ जुटाई जा सकती हैं।
मध्य रेलवे (Central railway) की महिला टिकट परीक्षक, सुजाता कलगांवकर ने 15 नवंबर, 2025 को एक यात्री को नकली सीज़न टिकट के साथ यात्रा करते हुए पकड़ा।सीएसएमटी-कल्याण विशेष दस्ते में कार्यरत टिकट परीक्षक, सुजाता कलगांवकर, 15.11.2025 को मस्जिद बंदर स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान यात्रियों के टिकटों की जाँच कर रही थीं।
नकली पास पर यात्रा
एक यात्री ने सीएसएमटी से दादर के लिए द्वितीय श्रेणी तिमाही सीज़न टिकट संख्या UFV-291148415 प्रस्तुत किया, जो 20.08.2025 से 19.11.2025 तक वैध था। सुजाता ने संदेह होने पर यात्री से पूछा कि सीज़न टिकट कहाँ से जारी किया गया था। यात्री ने बताया कि यह मस्जिद स्टेशन से जारी किया गया था, जबकि सीज़न टिकट पर जारी करने का स्टेशन भायखला लिखा था। आगे पूछताछ करने पर, यात्री ने अपना नाम शमीन शेख बताया, जबकि सीज़न टिकट पर उसका नाम मोहम्मद दिलशाद लिखा था।
मामला दर्ज
सुजाता को आभास हो गया कि सीज़न टिकट नकली है। उन्होंने तुरंत संबंधित व्यक्ति को सूचित किया और उस व्यक्ति को हिरासत में लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई।आगे की कार्रवाई के लिए अपराधी को जीआरपी/सीएसएमटी को सौंप दिया गया है।
वैध टिकट लेकर यात्रा करने की अपील
सुजाता की सतर्कता और तीक्ष्ण सोच ने एक नकली टिकट रैकेट का पर्दाफाश किया है जिसकी जाँच चल रही है। कर्तव्य के प्रति उनके समर्पण ने दूसरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।मध्य रेलवे यात्रियों से अपील करता है कि कृपया वैध टिकटों के साथ यात्रा करें और अधिकृत विक्रेताओं, काउंटरों या ऑनलाइन से टिकट प्राप्त करें।
मुंबई में निर्माण संबंधी प्रदूषण के खिलाफ शुरू किए गए एक बड़े प्रवर्तन अभियान में, स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) ने अनिवार्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों का पालन न करने पर 170 परियोजनाओं को नोटिस जारी किए हैं।
बिल्डरों को दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए 15 दिन का समय
अधिकारियों ने बताया कि बिल्डरों को दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है अन्यथा परियोजनाओं को काम रोकने के आदेश और संभावित रूप से बंद होने का सामना करना पड़ सकता है। यह कार्रवाई BMC द्वारा 2023 में जारी वायु प्रदूषण दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसके तहत सभी निर्माण स्थलों के लिए धूल नियंत्रण तंत्र अपनाना अनिवार्य है।स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, कई डेवलपर्स पूरी साइट को घेरने, वाटर फॉगिंग और एंटी-स्मॉग उपकरण जैसे बुनियादी उपायों को लागू करने में विफल रहे।
किन वार्ड में कितने बिल्डर्स को नोटिस
नोटिस के अनुसार, सबसे अधिक उल्लंघन आर/उत्तर वार्ड (दहिसर) में दर्ज किए गए, जहाँ 30 परियोजनाओं को नोटिस मिले। इसके बाद पी/नॉर्थ ईस्ट (मलाड ईस्ट) में 16, एस वार्ड (भांडुप) में 14, और के-वेस्ट (अंधेरी वेस्ट) और एच-वेस्ट (बांद्रा वेस्ट) दोनों में 12-12 नोटिस जारी किए गए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अन्य प्रभावित वार्डों में एफ-साउथ (परेल), एल वार्ड (कुर्ला) और एन वार्ड (घाटकोपर) शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक में 10 परियोजनाओं को चिह्नित किया गया है।
प्रयागराज. गोरखपुर से चलकर लोकमान्य तिलक टर्मिनस मुंबई जाने वाली गाड़ी संख्या 15018 काशी एक्सप्रेस में आज मंगलवार 18 अक्टूबर को बम होने की सूचना से हड़कंप मच गया. ट्रेन में बम की सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस द्वारा भदोही रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को रोका गया. यात्रियों को उतारा गया. अभी भी तलाशी अभियान जारी है.
बताया जा रहा है कि रेलवे कंट्रोल रूम को एक लैंडलाइन फोन से कॉल करके बताया गया कि गोरखपुर-एलटीटी एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 15018) ट्रेन में बम रखा है. कॉल के बाद तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया. ट्रेन भदोही पहुंचते ही यात्रियों को सुरक्षित रूप से उतार लिया गया और सभी को प्लेटफॉर्म पर रोक दिया गया. इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने कोच दर कोच तलाशी ली. सुरक्षाकर्मियों ने ट्रेन की बोगियों और शौचालयों और सामान रखने वाले हिस्सों तक की गहन जांच की. घटना के बाद स्टेशन पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया.
यात्रियों में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा. हालांकि स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया. रेलवे और पुलिस अधिकारी कॉल की सच्चाई और कॉलर की पहचान की जांच कर रहे हैं. अभी भी तलाशी अभियान जारी है. फिलहाल किसी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई है.
घटना के बाद स्टेशन पर एक्स्ट्रा पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया. शुरुआती अफरा-तफरी के बावजूद, स्थिति को तुरंत कंट्रोल में कर लिया गया. रेलवे और पुलिस अधिकारी कॉल की सच्चाई की जांच कर रहे हैं और कॉल करने वाले की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं. सर्च ऑपरेशन जारी है, अभी तक कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली है.
गोरखपुर में आयोजित जनता दरबार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी पीड़ित को न्याय पाने के लिए दर-दर भटकने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए, और प्रशासन की विफलता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुलिस थानों में सुनवाई की कमी, मुकदमों में देरी और उत्पीड़न की शिकायतों को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई।
शीघ्रता से करें समाधान
जानकारी के मुताबिक, आज के जनता दरबार में मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि पुलिस से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। यदि प्रशासन द्वारा की गई लापरवाही के कारण पीड़ित न्याय से वंचित हो रहे हैं, तो यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समयबद्ध तरीके से निवारण किया जाए और पीड़ितों को तुरंत राहत दी जाए। जनता दरबार में मुख्यमंत्री योगी के इस सख्त रुख को देखकर लोगों ने संतोष व्यक्त किया और यह उम्मीद जताई कि अब पुलिस थानों में शिकायतों का समाधान शीघ्रता से होगा।
बढ़ेगी पारदर्शिता
सीएम के आदेश के बाद, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा मामलों की समीक्षा और निगरानी तेज कर दी गई है, जिससे राज्यभर में पुलिस से संबंधित मामलों में पारदर्शिता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सीएम मोहन यादव ने देवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के लगभग 1.33 लाख किसानों के बैंक खातों में भावांतर भुगतान योजना की राशि सीधे ट्रांसफर कर दी है।
सोयाबीन किसानों को मिली घाटे की भरपाई
सरकार ने यह कदम सोयाबीन उत्पादक किसानों को बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए उठाया है। इस योजना के तहत, मुख्यमंत्री ने किसानों को 1300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कुल 233 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलवाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
भावांतर राशि तय करने के लिए सरकार ने 2025 के लिए 4130 रुपये प्रति क्विंटल का मॉडल रेट तय किया है। यह रेट उन किसानों पर लागू होता है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की फसल को मंडी परिसरों में बेचा है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मॉडल रेट में लगातार वृद्धि देखी गई है। इससे पहले, 7 नवंबर को मॉडल रेट 4020 रुपये था, जो बढ़कर 12 नवंबर तक 4077 रुपये प्रति क्विंटल हो गया था।
घर बैठे चेक करें
जिन किसानों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है, वे आसानी से अपना पेमेंट स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।
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