Tuesday, March 3, 2026
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Farrukhabad SP कार्यालय में विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई: वरिष्ठ लिपिक 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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फर्रुखाबाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के लेखा अनुभाग में तैनात एक वरिष्ठ लिपिक का रिश्वतखोरी मामला सामने आया है। लखनऊ से पहुंची विजिलेंस टीम ने उसे हेड कांस्टेबल से यात्रा और महंगाई भत्ता पास कराने के एवज में 15,000 रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि कार्यालय में हड़कंप मच गया।

विजिलेंस की योजना में यूं फंसा लिपिक

एसपी कार्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल आदित्य कुमार पटेल का 1.45 लाख रुपये का यात्रा और महंगाई भत्ता काफी समय से लंबित था। आरोप है कि लेखा अनुभाग का वरिष्ठ लिपिक हरेंद्र सिंह चौहान भुगतान मंजूर करने के लिए 15 हजार रुपये की मांग कर रहा था। कई प्रयासों के बावजूद जब विभागीय प्रक्रिया नहीं बढ़ी, तो हेड कांस्टेबल ने उप्र सतर्कता अधिष्ठान के सीओ राजन कुमार रावत से शिकायत की।

शिकायत के आधार पर विजिलेंस की छह सदस्यीय टीम ने गुरुवार को एसपी कार्यालय का निरीक्षण किया और शुक्रवार को ट्रैप की योजना लागू की। तय रकम लेकर हेड कांस्टेबल हरेंद्र के पास पहुंचे। जैसे ही लिपिक ने रुपये लिए और गिनने लगा, तभी पीछे से विजिलेंस टीम ने पहुंचकर उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस ले जाया गया, जहां करीब तीन घंटे तक उससे पूछताछ की गई। इसके बाद विजिलेंस टीम उसे अपने साथ लखनऊ ले गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी लिपिक मूल रूप से बुलंदशहर जनपद के खुर्जा का निवासी है और वर्तमान में उसका परिवार मेरठ के कृष्णा नगर में किराए के मकान में रह रहा है।

एसपी का बयान

एसपी आरती सिंह ने बताया कि विजिलेंस की कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। साथ ही उसे निलंबित कर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

 

कम पानी, ज्यादा फायदा : जानवरों से सुरक्षित, सरसों ने बदला खेती का गणित, किसानों के लिए लाभदायक

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सरसों की खेती

सरसों की खेती
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


जो किसान खेती में कम लागत, कम जोखिम और ज्यादा मुनाफा कमाना चाहने हैं, उनके लिए सरसों की खेती बेहतर विकल्प है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों की खेती न केवल सस्ती है, बल्कि इसे जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता और बाजार में इसका भाव भी गेहूं से कहीं अधिक मिलता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एक बीघा खेत में गेहूं की औसत पैदावार 15 से 17 क्विंटल होती है, जबकि सरसों की पैदावार 8 से 10 क्विंटल तक पहुंच जाती है। सरसों की खासियत यह है कि इसमें केवल एक या दो सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि गेहूं की फसल में बार-बार पानी देना पड़ता है। इससे पानी की बचत के साथ खेती की लागत भी घट जाती है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि जहां गेहूं की खेती में प्रति बीघा लगभग ₹17,000 का खर्च आता है और आमदनी अधिकतम ₹25,000 तक होती है। इसके मुकाबले सरसों की खेती में सिर्फ ₹10,000 की लागत पर किसान ₹40,000 तक की आय प्राप्त कर सकते हैं, यानी लगभग 6 से 8 गुना मुनाफा। यही कारण है कि विंध्य क्षेत्र समेत राज्य के कई इलाकों में किसान सरसों को लाभकारी विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

सरसों की एक और बड़ी खूबी यह है कि इसे नीलगाय या सूअर जैसे छुट्टा जानवर नहीं खाते, जबकि गेहूं और चने की फसलें अक्सर इनसे बर्बाद हो जाती हैं। इसके अलावा सरसों की फसल में न तो बड़ी बीमारियाँ लगती हैं और न ही अधिक खाद या छिड़काव की जरूरत पड़ती है। एक बार की देखभाल से यह फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है।

वर्तमान में सरसों का बाजार भाव ₹6,000 से ₹7,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। कम मेहनत और अधिक आमदनी के चलते सरसों अब किसानों की “सोने की फसल” बन गई है।

बस्ती-रूधौली श्री राम सहाय हायर सेकेंडरी स्कूल, थरौली रूधौली में बाल दिवस पर भव्य विज्ञान प्रदर्शनी किया गया का आयोजन

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बस्ती –  श्री राम सहाय हायर सेकेंडरी स्कूल, थरौली, रुधौली में बाल दिवस का  भव्य विज्ञान प्रदर्शनी का किया गया आयोजन  कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि उप-जिलाधिकारी रुधौली मनोज प्रकाश व विशिष्ट अतिथि भावेश पांडेय, अध्यक्ष नेशनल एसोसिएशन ऑफ यूथ, ने दीप प्रज्वलन कर  छात्रों द्वारा प्रस्तुत विज्ञान मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार, जिज्ञासा एवं आत्मविश्वास को विकसित करती हैं। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य छात्रों में वैज्ञानिक सोच, व्यावहारिक ज्ञान, टीमवर्क तथा समस्या समाधान कौशल को बढ़ावा देना है। प्रदर्शनी में छात्रों ने भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित अनेक आकर्षक और ज्ञानवर्धक प्रयोग तथा मॉडल प्रस्तुत किए।कार्यक्रम के सफल संचालन एवं संपूर्ण व्यवस्था का दायित्व विद्यालय के प्रबंध निदेशक  ओम शंकर पाण्डेय  द्वारा संभाला गया। प्रदर्शनी में विद्यालय के छात्रों से जल, अर्पिता, शौर्य पाण्डेय, सूर्य प्रताप यादव, प्रियांशी सिंह, सलोनी मिश्रा, श्रेया पाण्डेय, गरिमा, प्रतिभा मिश्र, काव्या मिश्रा, अंशिका पाण्डेय आदि ने अपने नवाचारी मॉडलों व कार्यशील परियोजनाओं से सभी को प्रभावित किया। कार्यक्रम में राजू पाण्डेय, राकेश शर्मा, गिरजेश भट्ट, अरविंद पाण्डेय, रविन्द्र चौधरी, नीलम गौड़ सहित रूधौली थाने का  स्टाफ और  विद्यालय के शिक्षक रामचंद्र मिश्र  शुभम सिंह भदौरिया, विवेक विश्वकर्मा, अंशिका सिंह, अब्दुल अहद, कृष्ण कुमार शुक्ला हिमांशु सोनी और  विद्यालय के प्रबंधक  आनंद पाण्डेय तथा निदेशक  विष्णु पाण्डेय ने छात्रों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।विज्ञान प्रदर्शनी ने छात्रों में वैज्ञानिक सोच, व्यावहारिक ज्ञान, टीमवर्क और समस्या समाधान कौशल को बढ़ावा दिया।

तीन दिवसीय विज्ञान प्रदर्शनी व बाल मेला में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा

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पंडित राधेश्याम पांडेय सरस्वती इंटर कॉलेज मे हुआ कार्यक्रम


पंकज जायसवाल
चरदा, बहराइच।शुक्रवार को पंडित राधेश्याम पाण्डेय सरस्वती इंटर कॉलेज चर्दा (जमोग) में तीन दिवसीय बाल मेला व विज्ञान प्रदर्शनी कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख नवाबगंज जयप्रकाश सिंह ने कहा कि आज हर क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी पहचान बनाई है। ऐसा तब हुआ है जब हमारे बीच के नन्हे मुन्ने बच्चों को विज्ञान की बेहतर शिक्षा अध्यापकों ने दी है। मुख्य अतिथि श्री सिंह ने कहा कि अति पिछड़े क्षेत्र में प्रबंधक कौशलेंद्र पांडेय ने एक बेहतर शिक्षण संस्थान की स्थापना करीब 15 वर्ष पहले की थी। आज इस शिक्षण संस्थान से उत्तीर्ण होकर कई छात्र-छात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे रहे हैं।

इस दौरान मुख्य अतिथि श्री सिंह ने तीन दिवसीय विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी के समापन अवसर पर छात्र-छात्राओं की ओर से लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया तथा छात्र-छात्राओं से उनकी ओर से लगाए गए प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारियां हासिल की। समापन कार्यक्रम में छात्र छात्राओं की ओर से बेहतर प्रस्तुति की गई। इससे पूर्व छात्र छात्राओं की ओर से 12 नवम्बर से प्रारम्भ इस तीन दिवसीय विज्ञान प्रदर्शनी व खेल प्रतियोगिता में कबड्डी, खो खो, रस्साकसी जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। शुक्रवार को समापन के दिन विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए तथा विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमे विभिन्न प्रकार के मौसम लैंप प्रोजेक्ट, कार्बन पॉल्यूशन, वॉटर पॉल्यूशन, स्मोक से होने वाली बीमारी, एनर्जी पावर आदि से सम्बंधित प्रोजेक्ट तथा बच्चों द्वारा लगाये गये  विभिन्न स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहा। कार्यक्रम आयोजन मे प्रबंधक कौशलेन्द्र पाण्डेय, बिजयलक्ष्मी पाण्डेय, अभय दीक्षित सहित शिक्षक अजय त्रिपाठी, जीबी पाठक, अनिल शर्मा, निसाद खान, अवनीश गुप्ता का विशेष योगदान रहा।

रिपोर्ट: पंकज जायसवाल

DSP दीप्ति शर्मा का यूपी में भव्य सम्मान, सीएम योगी और डीजीपी से की मुलाकात

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महिला क्रिकेट विश्व कप जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली भारतीय टीम की स्टार ऑलराउंडर और यूपी पुलिस में डीएसपी दीप्ति शर्मा का उत्तर प्रदेश में लगातार जोरदार स्वागत जारी है। आगरा में भव्य स्वागत के बाद शुक्रवार को दीप्ति शर्मा ने लखनऊ पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी राजीव कृष्णा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद रहे।

परिवार और डीएसपी ने कहा ये

जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात के दौरान दीप्ति और उनके परिवार ने प्रदेश सरकार द्वारा खिलाड़ियों के लिए की जा रही पहल की सराहना की। दीप्ति ने कहा कि पुलिस विभाग में डीएसपी के रूप में पदस्थापन उनके परिवार का सपना था, जो पूरा होने पर सभी बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि महिला क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए उनसे जो भी जिम्मेदारी मांगी जाएगी, वह उसे पूरा करने के लिए हमेशा तैयार हैं। सीएम योगी ने दीप्ति को विश्व कप विजय पर बधाई देते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं।

डीजीपी से भी की मुलाकात

लखनऊ में पुलिस मुख्यालय पहुंचकर दीप्ति ने डीजीपी राजीव कृष्णा से भी मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि भारत की मेजबानी में हुए महिला विश्व कप में टीम शुरुआत में भले ही संघर्ष कर रही थी, लेकिन सभी खिलाड़ियों ने हिम्मत नहीं हारी और शानदार वापसी करते हुए इतिहास रच दिया।

दीप्ति ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबला सबसे चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम के आत्मविश्वास ने उन्हें जीत दिलाई। फाइनल में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर भारत ने पहली बार महिला विश्व कप ट्रॉफी पर कब्जा किया।

अपने प्रदर्शन पर बात करते हुए दीप्ति ने कहा कि टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा जताया और मेहनत का फल प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट के रूप में मिला। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हमेशा उनके करियर का खास हिस्सा रहेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें, क्योंकि परिवार का साथ ही खिलाड़ी को सशक्त बनाता है।

कम पानी, ज्यादा फायदा : जानवरों से सुरक्षित, सरसों ने बदला खेती का गणित, किसानों के लिए लाभदायक

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सरसों की खेती – फोटो : सोशल मीडिया

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जो किसान खेती में कम लागत, कम जोखिम और ज्यादा मुनाफा कमाना चाहने हैं, उनके लिए सरसों की खेती बेहतर विकल्प है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों की खेती न केवल सस्ती है, बल्कि इसे जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता और बाजार में इसका भाव भी गेहूं से कहीं अधिक मिलता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एक बीघा खेत में गेहूं की औसत पैदावार 15 से 17 क्विंटल होती है, जबकि सरसों की पैदावार 8 से 10 क्विंटल तक पहुंच जाती है। सरसों की खासियत यह है कि इसमें केवल एक या दो सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि गेहूं की फसल में बार-बार पानी देना पड़ता है। इससे पानी की बचत के साथ खेती की लागत भी घट जाती है।

एक्सपर्ट कहते हैं कि जहां गेहूं की खेती में प्रति बीघा लगभग ₹17,000 का खर्च आता है और आमदनी अधिकतम ₹25,000 तक होती है। इसके मुकाबले सरसों की खेती में सिर्फ ₹10,000 की लागत पर किसान ₹40,000 तक की आय प्राप्त कर सकते हैं, यानी लगभग 6 से 8 गुना मुनाफा। यही कारण है कि विंध्य क्षेत्र समेत राज्य के कई इलाकों में किसान सरसों को लाभकारी विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

सरसों की एक और बड़ी खूबी यह है कि इसे नीलगाय या सूअर जैसे छुट्टा जानवर नहीं खाते, जबकि गेहूं और चने की फसलें अक्सर इनसे बर्बाद हो जाती हैं। इसके अलावा सरसों की फसल में न तो बड़ी बीमारियाँ लगती हैं और न ही अधिक खाद या छिड़काव की जरूरत पड़ती है। एक बार की देखभाल से यह फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है।

वर्तमान में सरसों का बाजार भाव ₹6,000 से ₹7,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। कम मेहनत और अधिक आमदनी के चलते सरसों अब किसानों की “सोने की फसल” बन गई है।

कोंकण रेलवे ने बिना टिकट यात्रियों से 12.81 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला

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कोंकण रेलवे पर लगातार टिकट जाँच अभियान चलाया जा रहा है और बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। चालू वित्त वर्ष में कोंकण रेलवे पर 1.82 लाख यात्री पकड़े गए और उनसे 12.81 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। कोंकण रेलवे बिना टिकट यात्रियों पर अंकुश लगाने और अधिकृत यात्रियों के लिए सुरक्षित, आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए टिकट जाँच अभियान चला रहा है।

अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच 5,493 विशेष टिकट जाँच अभियान 

अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच 5,493 विशेष टिकट जाँच अभियान चलाए गए। इन अभियानों में बिना टिकट और अनियमित टिकट वाले यात्रियों के 1,82,781 मामले पकड़े गए। परिणामस्वरूप, रेलवे टिकट किराया और जुर्माने के रूप में 12.81 करोड़ रुपये वसूले गए। अकेले अक्टूबर 2025 में 920 विशेष निरीक्षण अभियान चलाए गए। इनमें 42,645 बिना टिकट यात्री पकड़े गए। उनसे 2.40 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।

वैध टिकट लेकर यात्रा करने की अपील 

कोंकण रेलवे ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले वैध टिकट खरीद लें। बिना वैध टिकट के यात्रा करना एक अपराध है।  कोंकण रेलवे प्रशासन ने बताया कि पूरे रूट पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और टिकट जाँच अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कामिनी कौशल का 98 साल की उम्र में निधन

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मुंबई. भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का 98 साल की उम्र में निधन हो गया. वे देश की सबसे बुजुर्ग जीवित अभिनेत्री थीं. पिछले कुछ समय से वे उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. परिवार के करीबी सूत्र ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'कामिनी कौशल का परिवार बहुत निजी जीवन जीता है और इस समय उन्हें गोपनीयता की जरूरत है.

कामिनी कौशल ने अपने लंबे करियर में 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. वे स्वर्ण युग की चमकती सितारा थीं. उनका फिल्मी सफर साल 1946 में शुरू हुआ था. उनकी पहली फिल्म नीचा नगर थी. यह फिल्म कांस फिल्म फेस्टिवल में पाल्म डी ओर (गोल्डन पाम) जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी. इसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं.
उनकी प्रमुख फिल्मों में शहीद, नदिया के पार, शबनम, अरज़ू और बिरज बहू शामिल हैं. बिरज बहू के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. इसके अलावा दो भाई, जिद्दी, परास, नमूना, झांजर, आबरू, बड़े सरकार, जेलर, नाइट क्लब और गोदान जैसी फिल्में दर्शकों के दिलों में बसी हैं.

कामिनी कौशल का असली नाम उमा कश्यप था. उनका जन्म 16 जनवरी 1927 को लाहौर में हुआ था. वे पढ़ी-लिखी और संस्कारी परिवार से थीं. उन्होंने अंग्रेजी में एमए किया था. शादी के बाद भी उन्होंने अभिनय जारी रखा. उनके पति बीएस सैनी जल्दी चल बसे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. वे दो बेटों की मां बनीं और फिल्मों में सक्रिय रहीं. उन्होंने न सिर्फ अभिनय किया बल्कि कई फिल्मों के लिए कहानी और संवाद भी लिखे. 

रिटायर्ड IPS को बनाया गया यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन्सिक साइंसेज लखनऊ का नया निदेशक

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उत्तर प्रदेश शासन ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. जी.के. गोस्वामी (IPS-RR-1997, सेवानिवृत्त) को उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन्सिक साइंसेज (UPSIFS), लखनऊ का नया निदेशक नियुक्त कर दिया है। शासन के गृह (पुलिस सेवाएं) अनुभाग-9 की ओर से 13 नवंबर 2025 को जारी आदेश में बताया गया कि डॉ. गोस्वामी को यह जिम्मेदारी सेवायोजन की तिथि से अधिकतम एक वर्ष या शासन के अगले आदेश तक, जो पहले हो, सौंपी गई है। इस नियुक्ति पर राज्यपाल ने अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

डीजीपी की अनापत्ति के बाद प्रक्रिया पूरी

डॉ. गोस्वामी ने 30 सितंबर 2025 को निदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक UPSIFS के पद से सेवानिवृत्ति ली थी। इसके बाद उनके सेवायोजन के लिए डीजीपी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव, शासन के पत्रों और UPSIFS की जनरल बॉडी की बैठक (09 नवंबर 2025) में लिए गए निर्णयों के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।

सेवा शर्तें अलग से जारी होंगी

शासन ने स्पष्ट किया है कि निदेशक पद पर सेवायोजन से संबंधित विस्तृत सेवा शर्तों के आदेश पृथक रूप से जारी किए जाएंगे। साथ ही, गृह (पुलिस) अनुभाग-9 को UPSIFS सर्विस रेगुलेशन्स 2022 के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस आदेश की प्रतिलिपि डीजीपी, महालेखाकार, एडीजी मुख्यालय तथा डॉ. जीके गोस्वामी को भेजी गई है।यह नियुक्ति फॉरेन्सिक साइंस के क्षेत्र में यूपी की क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मुंबई में सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ की वर्क-टू-रूल नीति की धमकी

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छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर 6 नवंबर को अचानक हुए विरोध प्रदर्शन के लिए जीआरपी ने सेंट्रल रेलवे वर्कर्स एसोसिएशन (CRMS) के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसके बाद से संगठन ने प्रशासन के खिलाफ अपना रुख और कड़ा कर लिया है।(Central Railway Mazdoor Sangh CRMS work-to-rule threat in Mumbai)

संगठन के बोर्ड पर जारी एक नोटिस में चेतावनी दी गई है कि उसके सदस्य जल्द ही ‘वर्क-टू-रूल’ आंदोलन अपना सकते हैं।

क्या है वर्क-टू-रूल?

वर्क-टू-रूल कर्मचारियों द्वारा किया जाने वाला एक प्रकार का आंदोलन है, जिसमें कर्मचारी हर नियम, प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हैं। यानी वे दैनिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लचीलेपन, गति, समन्वय और विवेक को पूरी तरह से बंद कर देते हैं।दैनिक कार्यों में कर्मचारी अक्सर जल्दबाजी में, शॉर्टकट अपनाकर या अनुभव के बल पर काम करते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से चलती है। लेकिन वर्क-टू-रूल में वे एक इंच भी ज़्यादा कुछ नहीं करते।

काम की गति धीमी हो जाती है

कर्मचारी ड्यूटी पर होते हुए भी, इस सख्ती से काम की गति धीमी हो जाती है। प्रवेश-निकास में देरी, लंबा इंतज़ार, यार्ड में धीमी गति और अंततः ट्रेनों का संचालन, पूरे नेटवर्क के समय को प्रभावित कर रहा है।

संगठन का रुख

मंडल सचिव एस. के. दुबे ने कहा, “हमें इन मामलों की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से मिली। जीआरपी ने अभी तक हमारे किसी भी सदस्य या पदाधिकारी को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।” प्रस्तावित वर्क-टू-रूल आंदोलन के समय के बारे में उन्होंने कहा, “हम आंदोलन शुरू करने से पहले प्रशासन को उचित सूचना देंगे।”

क्या है मामला 

यह विवाद 6 नवंबर को सीएसएमटी के मोटरमैन-गार्ड लॉबी में अचानक हुए विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ। यह विरोध प्रदर्शन 9 जून को मुंब्रा में पाँच यात्रियों की मौत के मामले में दो सीआर इंजीनियरों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी के खिलाफ था।सीआरएमएस के दो पदाधिकारियों और 30-40 समर्थकों पर व्यस्त समय के दौरान लगभग एक घंटे तक उपनगरीय सेवाएं रोकने का आरोप है। इसके गंभीर परिणाम हुए। सैंडहर्स्ट रोड इलाके में पटरियों पर चल रहे दो यात्रियों की एक आती हुई ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई और तीन घायल हो गए।

सीआरएमएस का आरोप है कि वीजेटीआई तकनीकी रिपोर्ट, जो एफआईआर का आधार है, में “बड़ी त्रुटियाँ” हैं। उनका दावा है कि कर्मचारियों को “परेशान” करने और उनका मनोबल गिराने के लिए बाहरी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

सीआरएमएस के अध्यक्ष प्रवीण बाजपेयी ने कहा कि सीएसएमटी पर प्रदर्शन मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के बाहर एक आधिकारिक विरोध प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों की “अचानक प्रतिक्रिया” थी।

रेलवे पुलिस ने कहा कि जाँच चल रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।

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