जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान अर्णब विकराल रूप धारण कर चुका है। इसकी ताकत के साथ-साथ दायरा भी बढ़ता जा रहा है। बुधवार को जब यह आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा, तब हवा की रफ्तार लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर प्रतिघंटे और झोंकों की रफ्तार 170 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसके प्रभाव से पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बहुत भारी बारिश होने की आशंका है। उत्तर भारत के कई राज्यों में भी बेमौसम बारिश के आसार हैं। इससे खेती से लेकर रेल परिचालन और जनजीवन तक प्रभावित हो सकता है। सबसे ज्यादा खतरा आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में है।
चक्रवात अर्णब बुधवार को आंध्र प्रदेश तट से टकराएगा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार अति प्रचंड चक्रवाती तूफान अभी बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के पास तक पहुंच गया है। बुधवार दोपहर बापटला एवं विशाखापत्तनम के बीच तट पार करने की संभावना है।
तूफान के प्रभाव को देखते हुए तटीय राज्यों में बचाव और राहत की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। एनडीआरएफ की 31 टीमें तैनात की गई हैं। असमय बारिश के चलते खरीफ फसलों की कटाई, मड़ाई एवं भंडारण प्रभावित हो सकता है।
आंध्र प्रदेश में तटीय जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम एवं काकीनाडा सहित कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ भारी बारिश का खतरा है। ऊंची लहरें उठने की आशंका के बीच लोगों को समुद्र तट से दूर रहने और प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाने की सलाह दी गई है।
ओडिशा में गजपति और नबरंगपुर जिलों से बड़े पैमाने पर लोगों को हटाया जा रहा है। आठ जिलों में मंगलवार और बुधवार को स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी बारिश की आशंका है। झारखंड में अगले तीन दिनों तक मौसम खराब रह सकता है। रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
पूर्वी, मध्य, उत्तरी भारत में भारी बारिश की आशंका
अर्णब का प्रभाव उत्तर प्रदेश तक पहुंच सकता है, जहां 29 से लेकर 30 अक्टूबर तक कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। दिल्ली, पूर्वी मध्य प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी 29-30 अक्टूबर को कहीं-कहीं बारिश हो सकती है।
गरज-चमक और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम रेल मंडलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। करीब 600 किलोमीटर रेलमार्ग पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
