हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू – फोटो : सोशल मीडिया
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हिमाचल प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण को मजबूत करने के साथ-साथ सरकार अब नशे के खिलाफ भी निर्णायक मोर्चा खोलने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में दो अलग-अलग उच्च स्तरीय बैठकों में बड़े निर्णय लिए गए। एक ओर जहां राज्य में 222 स्वचालित दूध संग्रह प्रणाली (Automatic Milk Collection Systems) स्थापित की गई हैं, वहीं दूसरी ओर 15 नवंबर से ‘एंटी-चिट्टा अभियान’ की शुरुआत होगी।दुग्ध उत्पादन को नई दिशा: बढ़ी दूध संग्रह क्षमता, बनेगा नया प्लांट
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध उत्पादक प्रसंघ (मिल्कफेड) की समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य में दुग्ध क्षेत्र को आत्मनिर्भर और आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बीते दो वर्षों में 222 स्वचालित दूध संग्रह प्रणाली स्थापित की गई हैं, जिससे किसानों को पारदर्शी और तेज भुगतान सुनिश्चित हुआ है।
राज्य में 29 नए बल्क मिल्क कूलर लगाए गए हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता बनी रहती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की संख्या 716 हो गई है, जबकि मिल्कफेड को दूध बेचने वाले किसानों की संख्या 40 हजार से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि किन्नौर जिले के कड़छम या टापरी में एक नया दुग्ध प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया जाएगा, ताकि वहां से सेना और स्थानीय लोगों को दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराए जा सकें। वहीं, शिमला जिले के दत्तनगर स्थित दोनों दुग्ध संयंत्रों को आउटसोर्स आधार पर संचालित करने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने मंडी जिले के संयंत्र में नया मिल्क पाउडर प्लांट लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। उन्होंने प्रसंघ को अपने उत्पादों के विपणन को और सशक्त बनाने तथा उच्च गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में प्रसंघ के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव एम. सुधा देवी, प्रबंध निदेशक विकास सूद, वरिष्ठ प्रबंधक प्रीति और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अब चिट्टे के खिलाफ निर्णायक जंग: हर पंचायत में बनेगी नशा निवारण समिति
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर से “एंटी-चिट्टा अभियान” की शुरुआत शिमला के रिज मैदान से चौड़ा मैदान तक रैली के माध्यम से की जाएगी। तीन माह तक चलने वाले इस अभियान में सरकार, पुलिस, स्वयंसेवी संगठन, छात्र और समाज के सभी वर्ग शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दौरान राज्य स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक बहुस्तरीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस विभाग ने पहले ही चिट्टा से सर्वाधिक प्रभावित पंचायतों की पहचान कर ली है, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हर पंचायत में नशा निवारण समिति गठित की जाएगी, जिसके लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है। प्रत्येक समिति में अध्यक्ष सहित सात सदस्य होंगे और वे हर महीने बैठक कर क्षेत्र की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगी, जिसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों से साझा किया जाएगा।
ये समितियां स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेंगी। जिला स्तर पर ये समितियां संबंधित उपायुक्तों के माध्यम से अपनी रिपोर्टें भेजेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे का उन्मूलन प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए मुख्यमंत्री स्वयं इस अभियान की निगरानी करेंगे।





