मौसम विभाग का अलर्ट: कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की आशंका, दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव

0
0

दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव देखने को मिल रहा है। – फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नए साल की शुरुआत में मौसम ने एक बार फिर चौंकाया है। दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर क्षेत्र में अचानक बनी वायुमंडलीय अस्थिरता ने एक ‘रोग’ गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) को जन्म दिया है। यह प्रणाली श्रीलंका के तट की ओर बढ़ रही है और इसके असर से श्रीलंका के साथ-साथ दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है।

सिस्टम की स्थिति और रफ्तार
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह गहरा दबाव गुरुवार सुबह तक पोट्टुविल से करीब 420 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, बट्टिकलोआ और हम्बनटोटा से लगभग 470 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, त्रिंकोमाली के दक्षिण-पूर्व में स्थित है। भारत के संदर्भ में यह कराईकल से करीब 860 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और चेन्नई से लगभग 1,020 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में दर्ज किया गया है।

आईएमडी ने बताया कि यह प्रणाली पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए शुक्रवार दोपहर तक दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी को पार कर सकती है और शुक्रवार शाम या रात तक श्रीलंका के तट पर हम्बनटोटा और कलमुनई के बीच कहीं टकराने की संभावना है।

दक्षिण भारत में बारिश की चेतावनी
इस मौसम प्रणाली का असर भारत के दक्षिणी राज्यों पर भी पड़ने की आशंका है। आईएमडी ने अगले तीन दिनों के लिए केरल, तमिलनाडु, लक्षद्वीप और निकोबार द्वीपसमूह में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। विशेष रूप से तमिलनाडु में शनिवार को कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा शुक्रवार से तीन दिनों तक तमिलनाडु में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है। केरल और माहे में शनिवार को भारी वर्षा हो सकती है।

समुद्र में उग्र मौसम, मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह
आईएमडी के अनुसार, गुरुवार को श्रीलंका तट, मन्नार की खाड़ी और उससे सटे कोमोरिन क्षेत्र में 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिनकी झोंके 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। बाद में हवा की गति बढ़कर 40–50 किलोमीटर प्रति घंटा (झोंके 60 किमी/घंटा) तक पहुंच सकती है, हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे इसमें कमी आने की संभावना है।

तमिलनाडु और पुडुचेरी के तटीय क्षेत्रों में भी गुरुवार और शुक्रवार को तेज हवाओं और उग्र समुद्री हालात बने रह सकते हैं। उत्तर तमिलनाडु और पुडुचेरी तट पर शुक्रवार और शनिवार को भी समुद्र में हलचल रहने का अनुमान है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

वैश्विक मॉडलों का आकलन
अमेरिकी जॉइंट टाइफून वॉर्निंग सेंटर (JTWC) ने इस प्रणाली के लिए वातावरण को आंशिक रूप से अनुकूल बताया है। ऊपरी वायुमंडल में ‘विंडो इफेक्ट’ की मौजूदगी से सिस्टम को ऊर्जा मिल रही है और समुद्र सतह का तापमान 28–29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। हालांकि, मध्यम से उच्च स्तर की ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (27–37 किमी/घंटा) इसके तीव्र रूप लेने में बाधा बन रही है।

सीमित तीव्रता की संभावना
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक पवन कतरन के कारण सिस्टम के मजबूत होने की संभावना सीमित है। ऊंचाई के साथ हवा की दिशा और गति में तेज बदलाव होने से तूफान का ऊर्ध्वाधर ढांचा कमजोर पड़ सकता है। इसी वजह से जेटीडब्ल्यूसी ने फिलहाल इसके और अधिक तीव्र होने की संभावना को मध्यम स्तर तक ही सीमित माना है।

मॉडल अनुमानों में मतभेद
कुछ वैश्विक मौसम मॉडल इस प्रणाली को अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत दिखा रहे हैं, जबकि अन्य इसमें सीमित ताकत ही देख रहे हैं। ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम और अमेरिकी नौसेना के मॉडल इसे 64 किमी/घंटा की रफ्तार (लगभग चक्रवात स्तर) से आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। वहीं, यूरोपीय मॉडल का अनुमान है कि यह प्रणाली बहुत कम समय के लिए ही इस तीव्रता तक पहुंच सकती है।

आगे क्या असर पड़ेगा?
मौसम विभाग का कहना है कि भले ही यह सिस्टम बड़े चक्रवात में न बदले, लेकिन इसके कारण भारी बारिश, तेज हवाएं और समुद्री उथल-पुथल से जनजीवन और तटीय गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। संबंधित राज्यों और श्रीलंका में प्रशासन को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।