
महाराष्ट्र के लासलगांव में स्थित प्याज की मंडी। – फोटो : गांव जंक्शन
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
बांग्लादेश सरकार ने भारत से प्याज आयात के लिए नए परमिट जारी करना बंद कर दिया है। यह फैसला खास तौर पर हिली लैंड पोर्ट से होने वाले आयात पर लागू किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू प्याज उत्पादकों के हित और स्थानीय खरीफ फसल को समर्थन देने के लिए उठाया गया है। हालांकि, पहले से स्वीकृत परमिट के तहत आयात 30 जनवरी तक जारी रहेगा।नासिक से रोजाना होता था भारी निर्यात
फिलहाल नासिक जिले से प्रतिदिन करीब 1,500 टन प्याज 50–55 ट्रकों के जरिए बांग्लादेश भेजा जा रहा था। नए परमिट रुकने से निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ी है, जिसका सीधा असर लासलगांव एपीएमसी समेत पूरे जिले की मंडियों में दिखाई दे रहा है।
मंडियों में आवक बढ़ी, कीमतों पर दबाव
पिछले 15 दिनों में नासिक जिले की विभिन्न मंडियों में करीब 20 लाख क्विंटल प्याज की आवक हुई है। साथ ही, महाराष्ट्र से खरीफ प्याज की सप्लाई बढ़ने से बाजार में अतिरिक्त दबाव बना है। नतीजतन, थोक दाम 22 रुपये प्रति किलो से गिरकर 16–18 रुपये प्रति किलो तक आ गए हैं।
किसानों को ₹175-200 करोड़ का नुकसान
निर्यात में सुस्ती और कीमतों में गिरावट के चलते नासिक के किसानों को लगभग ₹175 से ₹200 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। किसानों का कहना है कि उत्पादन लागत बढ़ गई है, लेकिन बाजार में प्याज लागत से नीचे बिक रहा है।
निर्यात पूरी तरह बंद नहीं, भरोसा कमजोर
हालांकि नए परमिट बंद हैं, फिर भी वैध परमिट के तहत रोजाना 45–60 ट्रक प्याज बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं। इसके बावजूद निर्यातकों का कहना है कि बाजार का भरोसा कमजोर पड़ा है और खरीदार ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं।
अन्य देशों में भी बढ़ी प्रतिस्पर्धा
सऊदी अरब, मलेशिया, वियतनाम, सिंगापुर और खाड़ी देशों में भारतीय प्याज की मांग बनी हुई है, लेकिन पाकिस्तान से सस्ती दरों पर प्याज उपलब्ध होने के कारण भारतीय निर्यातकों पर कीमत घटाने का दबाव है।
आगे क्या हो सकती है स्थिति
निर्यातकों का अनुमान है कि अगले 10 दिनों में प्याज के दाम 15–20 रुपये प्रति किलो के दायरे में स्थिर हो सकते हैं, लेकिन बांग्लादेश की नीति पर आगे के फैसले से बाजार की दिशा तय होगी।




