इस्लामाबाद। गंभीर आर्थिक तंगी का सामना कर रहे पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के बीच लगभग 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक सहायता को लेकर एक महत्वपूर्ण स्टाफ-लेवल समझौता हुआ है। इस नए समझौते के अंतर्गत पाकिस्तान को उसके चल रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के लिए करीब 1 अरब डॉलर और जलवायु व आर्थिक स्थिरता से जुड़े कार्यक्रमों के तहत लगभग 21 करोड़ डॉलर मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, इन दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल सहायता राशि बढ़कर लगभग 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।
पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में अब धीरे-धीरे रिकवरी के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश की आर्थिक विकास दर लगभग 3.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके अलावा, महंगाई दर में भी पहले के मुकाबले राहत मिली है और सितंबर महीने में यह घटकर लगभग 10.3 प्रतिशत पर आ गई है। विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस ने भी देश की अर्थव्यवस्था को गिरने से बचाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके चलते सितंबर के अंत तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब 21.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। संस्था का यह भी मानना है कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार होना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसकी दोबारा पहुंच बनना अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक पहलू हैं।
भविष्य की आर्थिक चुनौतियाँ और चेतावनियाँ
एक तरफ जहाँ यह राहत पाकिस्तान के लिए मददगार साबित हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ आईएमएफ ने देश को कई मोर्चों पर सख्त चेतावनियाँ भी जारी की हैं। संस्था का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा के बढ़ते दाम, कठिन वित्तीय परिस्थितियाँ और व्यापारिक बाधाएँ देश के आर्थिक सुधार की प्रक्रिया के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार को सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाने और अपनी टैक्स प्रणाली को अधिक मजबूत करने की हिदायत दी है। इसके अलावा, सरकार पर बढ़ते कर्ज के बोझ और ब्याज के भारी दबाव को कम करने के लिए सरकारी खर्च, खरीद प्रक्रियाओं और नकदी प्रबंधन में सुधार करने पर जोर दिया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र और सब्सिडी पर विशेष जोर
आईएमएफ ने पाकिस्तान के ऊर्जा सेक्टर में सुधार को सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया है। इसमें बिजली की दरों में समय पर संशोधन करना, बिजली वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करना और लगातार बढ़ रहे ऊर्जा क्षेत्र के घाटे को नियंत्रण में लाना शामिल है। दूसरी ओर, सरकार द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च बढ़ाए जाने की सराहना की गई है, लेकिन साथ ही यह सलाह भी दी गई है कि खर्चीली फ्यूल सब्सिडी योजनाओं को जल्द से जल्द पूरी तरह समाप्त किया जाए ताकि वित्तीय संतुलन कायम रखा जा सके।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026





















