ट्रंप की ‘स्पेस में स्वतंत्रता’ घोषणा से चंद्रमा पर नया मुकाबला, अंतरिक्ष रेस में भारत के लिए बड़ी चुनौती

0
1

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मिडटर्म चुनावों के दौरान अमेरिकी स्पेस फ्रीडम डिक्लेरेशन जारी कर घोषणा की कि अमेरिका अंतरिक्ष की खोज, विकास, उपयोग और बसावट में नेतृत्व करेगा।

उन्होंने 2028 तक चंद्रमा पर वापसी, स्थायी अमेरिकी उपस्थिति और मंगल पर मानव मिशन का वादा किया। इस घोषणा को आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा गया है।

हालांकि इसके पीछे बड़ा भू-राजनीतिक सवाल है कि पृथ्वी से परे विस्तार के नियम कौन तय करेगा और अंतरिक्ष वैश्विक साझा क्षेत्र रहेगा या राष्ट्रीय हितों का अखाड़ा बनेगा।

स्पेस थिंक टैंक स्पेसपोर्ट सारभाई की निदेशक सुस्मिता मोहंती ने कहा कि ट्रंप एक तरफ अंतरिक्ष को सभी मनुष्यों का क्षेत्र बताते हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी नागरिकों की स्थायी उपस्थिति की बात करते हैं। दोनों बयानों में तनाव साफ है।

भारतीय स्पेस एसोसिएशन के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट (सेवानिवृत्त) का मानना है कि यह घोषणा अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले प्रतिस्पर्धी ढांचों की ओर इशारा करती है। अब आर्टेमिस समूह और चीन-रूस के आईएलआरएस समूह के बीच साफ विभाजन दिख रहा है। स्पेस उपनिवेशीकरण और स्वामित्व जैसे मुद्दे भविष्य में टकराव के बीज बो सकते हैं।

भारत की स्थिति जटिल है। उसने 2023 में आर्टेमिस अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन 1979 के मून एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने के बावजूद इसे अनुमोदित नहीं किया। अगस्त 2026 में नासा ने इसरो को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया था। भारत का अपना स्पेस विजन 2047 है, जिसमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानव चंद्रमा लैंडिंग शामिल है।

भट्ट के अनुसार, भारत को अपनी स्थिति पर व्यापक राष्ट्रीय बहस करनी चाहिए। चुनौती यह है कि प्रतिस्पर्धी स्पेस शक्तियों के साथ काम करते हुए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखे और अगले मोर्चे के नियमों में अपनी आवाज सुनिश्चित करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here