सरकार पर 3.56 लाख मुकदमों का बोझ: 41 मंत्रालयों ने नहीं बनाई लीगल सेल, इसी महीने लॉन्च होगा पोर्टल

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जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जनविश्वास कानून इसीलिए बनाया है, ताकि सामान्य प्रक्रियात्मक या तकनीकी उल्लंघन वाले मामलों को आपराधिक श्रेणी से निकाल कर उनका जल्द निपटारा किया जाए और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा दिया जा सके। इसके बावजूद तमाम मंत्रालयों और विभागों का रुख इसके प्रति काफी ठंडा है।

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन द्वारा ”लिटिगेशन गवर्नेंस” की समीक्षा किए जाने पर सामने आया कि सरकार पर पांच वर्ष से भी अधिक पुराने 356215 मुकदमों का बोझ है, लेकिन उनके प्रबंधन के लिए 41 मंत्रालयों-विभागों ने अब तक लीगल मैनेजमेंट सेल ही गठित नहीं किए हैं। इन सभी विभागों से कहा गया है कि इसी महीने के अंत तक सेल गठित कर लें और जिन मुदकमों को वापस लिया जा सकता है या निस्तारण किया जा सकता है, उसे चिन्हित कर अमल के लिए आगे बढ़ें।

कैबिनेट सचिव ने सभी मंत्रालयों के सचिवों के साथ बैठक की। सभी मंत्रालयों और विभागों की समीक्षा में सामने आया है कि इन साढ़े तीन लाख से अधिक लंबित मामलों में 105809 मामले 19 उच्च न्यायालयों में चल रहे हैं। लंबित मामलों में सबसे आगे राजस्व विभाग है। उससे संबंधित 127675 मामले हैं। वहीं, समीक्षा में यह भी पाया गया कि लीगल सेल गठित न करने के अलावा एक और सुस्ती मंत्रालयों और विभागों ने दिखाई है।

दरअसल, लिटिगेशन गवर्नेंस में कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए सितंबर, 2026 में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन इनके द्वारा अधिकारियों को नामित नहीं किए जाने के कारण वह आयोजित ही नहीं हो सका। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने जनविश्वास कानून के महत्व को रेखांकित करते हुए निर्देशित किया है कि नवंबर में ही सभी शेष 41 मंत्रालय और विभाग सेल गठित कर लें।

‘जन विश्वास विधेयक’ के तहत कुछ प्रविधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किए जाने और स्थापित कानूनों के दृष्टिगत ऐसे मुकदमों की पहचान करें, जिन्हें वापस लिया जा सकता है। कैबिनेट सचिवालय की ओर से यह निर्देश भी दिया गया है कि मध्यस्थता के माध्यम से समाधान के लिए लंबित मुकदमों की जांच करें। मुकदमा दायर करने का निर्णय लेने से पहले उपयुक्त मामलों में मध्यस्थता और समझौते की संभावनाओं की जांच कर लें।

बताया गया है कि इसी महीने सरकार लिटिगेशन मैनेजमेंट पोर्टल भी लॉन्च करने जा रही है, जिसके माध्यम से एलएमसी की कार्यप्रणाली, लंबित मामलों की समीक्षा, मध्यस्थता, स्क्रीनिंग, अपील आदि की समीक्षा की जाएगी। पोर्टल लॉन्च होने के बाद सभी मंत्रालयों-विभागों को तय मापदंडों पर लंबित मामलों का ब्योरा इस पर अपडेट करना होगा।

यहां उल्लेखनीय है कि लीगल मैनेजमेंट सेल गठित न करने वालों में राजस्व विभाग, डाक विभाग, रक्षा विभाग, मिलिट्री अफेयर्स, गृह मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग सहित ऐसे भी मंत्रालयों-विभागों के नाम शामिल हैं, जिनसे संबंधित तमाम मामले लंबित हैं।

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