बस्ती। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर भाकपा-माले ने बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। मतदाता अधिकारों और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। एसआईआर को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों और वाम संगठनों की ओर से देशभर में विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
ज्ञापन में भाकपा-माले ने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और एसआईआर से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी ने मांग की कि सूची से गलत तरीके से बाहर किए गए लोगों का मतदान अधिकार बहाल किया जाए और एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने की मांग की गई।
पार्टी ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल कर चयन समिति गठित करने की मांग रखी।
ज्ञापन के बाद भाकपा-माले जिला प्रभारी का. रामलौट और भाकपा के सह सचिव का. रामदयाल ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और निर्वाचन आयोग को गंभीरता से विचार करना चाहिए। मांगें पूरी नहीं होने पर बृहद आंदोलन की चेतावनी दी।
बैठक में 26 अक्तूबर को विस्तृत बैठक करने का निर्णय लिया गया। वहीं, माकपा नेता का. केके तिवारी के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर शोक संवेदना व्यक्त की गई। इस दौरान श्याम मनोहर, राजकुमार प्रजापति, रेनूबाला, जवाहर प्रसाद, दात्रे, विनय कुमार, रामानंद और गौरीशंकर मौजूद रहे। संवाद
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