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‘लोहे की छड़ और बोरा ही सहारा’, बस्ती के ‘सर्प मित्र’ 3 बार सर्पदंश झेलने के बाद भी निभा रहे जान बचाने का फर्ज

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'लोहे की छड़ और बोरा ही सहारा', बस्ती के 'सर्प मित्र' 3 बार सर्पदंश झेलने के बाद भी निभा रहे जान बचाने का फर्ज

बस्ती के सर्प मित्र हरे राम ने अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद लगभग 2500 सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा है।
ठेले पर भुजा बेचकर जीवन यापन करने वाले हरे राम ने तीन बार सर्पदंश झेलने के बाद भी दूसरों की जान बचाने का अपना जुनून नहीं छोड़ा।

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