सिद्धार्थनगर जिला कारागार में गुरुवार को एचआईवी और टीबी जैसी बीमारियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम हुआ। इस दौरान जेल में मौजूद कुल 553 बंदियों की एचआईवी और टीबी की जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बंदियों और जेल कर्मचारियों को बीमारियों के लक्षण, बचाव, जांच, उपचार और संक्रमण से जुड़ी जरूरी जानकारी दी। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एचआईवी और टीबी को लेकर सही जानकारी ही बचाव का बड़ा जरिया है। टीबी का समय पर पता चलने पर उसका इलाज संभव है। उन्होंने कहा कि लगातार दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना, कमजोरी और भूख कम लगना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज शुरू कराना चाहिए। बंदियों को यह भी बताया गया कि टीबी का इलाज शुरू होने के बाद दवाओं का नियमित सेवन और डॉक्टर की सलाह का पालन जरूरी है। बीमारी को छिपाने या खुद इलाज करने के बजाय स्वास्थ्यकर्मियों से संपर्क करने पर जोर दिया गया। एचआईवी को लेकर संक्रमण के कारणों, बचाव, जांच और सलाह की जानकारी भी दी गई। बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव और गलतफहमियों को दूर करने की अपील भी की गई। मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में बताया स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेल में मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी की शुरुआती पहचान इलाज को आसान बनाती है। कार्यक्रम के दौरान बंदियों और कर्मचारियों के सवालों के जवाब दिए गए। उन्हें सही डॉक्टरी जानकारी पर भरोसा करने के लिए जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में जेल अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जेल प्रशासन के अधिकारी, एचआईवी-टीबी कार्यक्रम से जुड़े स्वास्थ्यकर्मी, काउंसलर और लैब टेक्नीशियन समेत कई लोग मौजूद थे।
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