भुवनेश्वर। खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (एमडीएमआर संशोधन एक्ट , 2026) को लेकर ओडिशा में सियासी घमासान तेज हो गया है। संबलपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं बीजू जनता दल (BJD) अध्यक्ष नवीन पटनायक द्वारा ओडिशा के सांसदों को लिखे पत्र का जवाब देते हुए संशोधन कानून का मजबूती से बचाव किया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक बहस स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन तथ्यों को छिपाकर और झूठे भय का माहौल बनाकर ओडिशा की जनता को गुमराह करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद में ओडिशा की आवाज के रूप में सांसदों की प्राथमिक जिम्मेदारी राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ राज्य के व्यापक आर्थिक और संरचनात्मक हितों की रक्षा करना है।
उन्होंने एमडीएमआर संशोधन अधिनियम, 2026 को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने, राज्य के राजस्व की रक्षा करने तथा स्थानीय उद्योगों और आम नागरिकों को महंगाई के दबाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्य का करीब 90 प्रतिशत खनन राजस्व सुरक्षित रहेगा।
नवीन पटनायक की इस आशंका को खारिज करते हुए कि नए कानून से ओडिशा अपने राजस्व हिस्से से वंचित हो सकता है, प्रधान ने कहा कि खनन क्षेत्र से प्राप्त कुल राजस्व का लगभग 90 प्रतिशत सीधे राज्य के खजाने में जाएगा।
उन्होंने कहा कि ओडिशा को अपने नीलामी प्रीमियम का 110 प्रतिशत, रॉयल्टी का 15 प्रतिशत और जिला खनिज फाउंडेशन के तहत मिलने वाली पूरी राशि पूर्ववत प्राप्त होती रहेगी। प्रधान ने दावा किया कि नए प्रावधान राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा करते हुए खनन क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे।
2015 के सुधारों के बाद खनन राजस्व दस गुना बढ़ा : प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के खनन राजस्व में पिछले एक दशक के दौरान हुई वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से पहले खनन पट्टों का आवंटन पारदर्शी तरीके से नहीं होता था और इसका परिणाम यह रहा कि राज्य का वार्षिक खनन राजस्व करीब 5,000 करोड़ रुपये तक सीमित रहा।
प्रधान के अनुसार, 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा किए गए एमडीएमआर सुधारों के बाद पारदर्शी ई-नीलामी व्यवस्था लागू की गई और रॉयल्टी की दर 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की गई। उन्होंने दावा किया कि इन सुधारों के परिणामस्वरूप ओडिशा का वार्षिक खनन राजस्व लगभग दस गुना बढ़कर करीब 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
अनियंत्रित कर से उद्योगों पर पड़ने वाले दबाव का किया जिक्र
खनिज वाली जमीन पर अनियंत्रित और मनमाने शुल्क लगाए जाने के मुद्दे पर प्रधान ने कहा कि इससे केन्दुझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, अंगुल और जाजपुर जैसे औद्योगिक जिलों में खनन एवं औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि ऐसे अतिरिक्त शुल्क से खनन और विनिर्माण इकाइयों की लागत बढ़ती, जिससे लाखों युवाओं के रोजगार पर संकट पैदा हो सकता था।
प्रधान ने यह भी कहा कि खनिजों की लागत बढ़ने का असर इस्पात, सीमेंट, बिजली और कोयला जैसे क्षेत्रों पर पड़ता और अंततः इसका बोझ आम मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ सकता था। इससे मकान निर्माण की लागत, बिजली दरों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की आशंका रहती। उन्होंने कहा कि संशोधित कानून की धारा 9D ऐसे अनियंत्रित करों पर एक निर्धारित सीमा तय करती है, जिससे इस तरह के जोखिम को दूर किया गया है।
डीएमएफ के तहत ओडिशा को 37,000 करोड़ रुपये से अधिक मिले
प्रधान ने जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ ) के माध्यम से ओडिशा के खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध कराई गई राशि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2015 से अब तक डीएमएफ के माध्यम से ओडिशा को खनन क्षेत्रों के विकास के लिए 37,000 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए हैं। इस राशि का उपयोग पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में किया जाना है।
हालांकि, प्रधान ने पूर्ववर्ती बीजेडी सरकार के दौरान डीएमएफ राशि के इस्तेमाल को लेकर सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन से प्रभावित नहीं होने वाले 976 गांवों में 983 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि सीधे प्रभावित 584 गांवों को किसी परियोजना के लिए धन नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ग्रामसभा की मंजूरी लिए बिना 1,730 परियोजनाएं लागू की गईं।
ओआरआईएसईडी एक्ट को लेकर भी पूर्व बीजेडी सरकार पर निशाना धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट (ओआरआईएसईडी) एक्ट, 2004 को लेकर भी पूर्व बीजेडी सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि 2005 में हाईकोर्ट द्वारा ओआरआईएसईडी एक्ट को रद्द किए जाने के बाद कानूनी खामियों को दूर करने के लिए विधानसभा में आवश्यक संशोधन लाने के बजाय तत्कालीन सरकार ने 18 वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट में मामला चलाया। प्रधान ने सवाल उठाया कि जब कानून में कानूनी कमियां थीं, तो उन्हें दूर करने के लिए विधानसभा में संशोधन क्यों नहीं लाया गया।
राज्य और युवाओं के हित में सांसदों ने किया विधेयक का समर्थन धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा के सांसदों ने राज्य के व्यापक हित, औद्योगिक विकास और युवाओं के रोजगार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संसद में एमडीएमआरसंशोधन विधेयक, 2026 का समर्थन किया है।
उन्होंने नवीन पटनायक से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस कानून का समर्थन करें। प्रधान ने कहा कि यह कानून ओडिशा के आर्थिक विकास, औद्योगिक समृद्धि और युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।




























