Home देश जन्माष्टमी पर ग्वालियर में दिखा भव्य नजारा, 100 करोड़ के बेशकीमती गहनों...

जन्माष्टमी पर ग्वालियर में दिखा भव्य नजारा, 100 करोड़ के बेशकीमती गहनों से सजे राधा-कृष्ण

0
1
News Desk

ग्वालियर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देश भर के साथ-साथ ग्वालियर में भी भक्ति और आस्था का उल्लास चरम पर है। शहर के फूलबाग परिक्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक 'गोपाल मंदिर' में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। जन्माष्टमी के इस खास मौके पर मंदिर में विराजे भगवान राधा-कृष्ण का 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के बेशकीमती रत्नजड़ित आभूषणों से पारंपरिक राजसी श्रृंगार किया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

लॉकर से निकाले गए सिंधिया रियासतकालीन आभूषण

हर साल की परंपरा के अनुसार गोपाल मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण के लिए सिंधिया रियासतकालीन सोने-चांदी और बहुमूल्य रत्नों से जड़े गहने तथा चांदी के बर्तन बैंक के लॉकर से कड़ी सुरक्षा के बीच निकाले गए। नगर निगम अधिकारियों ने सूची से एक-एक आभूषण का बारीकी से मिलान किया और गिनती पूरी करने के बाद भगवान का दिव्य श्रृंगार संपन्न कराया। इस विशेष प्रक्रिया के दौरान ग्वालियर की महापौर डॉ. शोभा सिकरवार, नगर निगम सभापति मनोज तोमर और नगर निगम कमिश्नर अभिषेक चौधरी सहित वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे।

35 करोड़ का सात लड़ियों का हार और पन्ना-माणिक का अद्भुत श्रृंगार

भगवान राधा-कृष्ण का श्रृंगार हीरा, पन्ना, माणिक, पुखराज, नीलम और असली मोतियों से युक्त सोने के मुकुट तथा अन्य पारंपरिक गहनों से किया गया है।

इस राजसी श्रृंगार में सबसे मुख्य आकर्षण 62 असली मोतियों और 55 पन्नों से तैयार किया गया सात लड़ियों का प्रसिद्ध हार है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा, भगवान को भोग अर्पित करने के लिए विशेष रूप से सिंधिया कालीन चांदी के बर्तनों का ही उपयोग किया जाता है।

ड्रोन और मेटल डिटेक्टर से निगरानी, रात 12 बजे तक होंगे दर्शन

भगवान के इस बेशकीमती श्रृंगार और मंदिर में उमड़ रही भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अमला दो शिफ्टों में 24 घंटे लगातार ड्यूटी दे रहा है।

  • कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: पूरे मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में मेटल डिटेक्टर और ड्रोन कैमरों से पैनी निगरानी रखी जा रही है।

  • लॉकर में वापसी: आरती के बाद मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं, जो रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। मध्यरात्रि महाआरती और जन्मोत्सव के पश्चात सभी आभूषणों को पुनः कड़ी सुरक्षा के बीच बैंक के लॉकर में सुरक्षित जमा करा दिया जाएगा।

अलौकिक रूप देखकर भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

वर्षों से जन्माष्टमी पर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं में भगवान का यह राजसी रूप देखने के लिए भारी उत्साह नजर आया। मंदिर पहुंचे भक्तों का कहना था कि कान्हा का हर रूप मनमोहक होता है, लेकिन जब उन्हें इन ऐतिहासिक और अनमोल रत्नों से सजा देखा तो उनसे नजर हटाना मुश्किल हो गया।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here