
बलरामपुर में शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था में बदलाव समेत कई मांगों को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध जताया। वे वीर विनय चौराहे से पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देकर उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की। दोपहर करीब एक बजे प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन एडीएम को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में सामान्य वर्ग की समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से आरक्षण की व्यवस्था मुख्य रूप से जातिगत आधार पर चल रही है। उनका तर्क था कि सामान्य वर्ग में भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार हैं। ऐसे में सरकारी नौकरियों में अवसर देने के लिए आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि जातिगत आरक्षण व्यवस्था के कारण कई काबिल उम्मीदवारों को मौका नहीं मिल पाता है। प्रदर्शनकारियों ने जातिगत आधार पर आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग की। उन्होंने इसे राष्ट्रहित में जरूरी बताया। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने एससी-एसटी एक्ट में सुधार या इसे खत्म करने की मांग की। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि इस कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों का आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 वापस लेने और सामान्य वर्ग के हितों के लिए राष्ट्रीय सवर्ण आयोग बनाने की मांग भी उठाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में चार मुख्य मांगें रखीं। इनमें जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करना, एससी-एसटी एक्ट को खत्म करना, यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 वापस लेना और राष्ट्रीय सवर्ण आयोग बनाना शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति से ज्ञापन पर ध्यान देने और संबंधित अधिकारियों को जरूरी कार्रवाई के निर्देश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाना राष्ट्रहित में होगा।
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