डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन B28 का इंतजार अब कुछ ही महीनों में खत्म होने वाला है। देश में वो भी दौर आने वाला है, जब पटरियों पर बुलेट ट्रेन दौड़ेगी।
भारतीय रेलवे ने बताया कि देश की पहली बुलेट ट्रेन ने सुरक्षा मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया है। अब इसका ‘व्हीकल बॉडी शेल असेसमेंट’ (जिसे आमतौर पर ‘स्क्वीज टेस्ट’ कहा जाता है) किया जा रहा है।
बुलेट ट्रेन का यह टेस्ट बेंगलुरु में BEML की निर्माण इकाई में किया गया। यह केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (PSU) देश की पहली दो स्वदेशी बुलेट ट्रेनें बना रहा है, जिनमें से प्रत्येक ट्रेन में 8 कोच होंगे।
स्क्वीज टेस्ट में यह जांचा जाता है कि क्या ट्रेन का बाहरी ढांचा किसी टक्कर या दुर्घटना की स्थिति में बिना अपना आकार खोए या ढांचे को कोई नुकसान पहुंचे बहुत अधिक दबाव और बाहरी ताकतों को झेल सकता है या नहीं।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह टेस्ट इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये ट्रेनें बहुत तेज गति से चलेंगी। दुर्घटना या टक्कर की स्थिति में, इनका बाहरी ढांचा इतना मजबूत होना चाहिए कि वह भारी बाहरी दबाव को सहन कर सके।
मंत्रालय ने इस कॉरिडोर के निर्माण की समय-सीमा भी बताई। इसके तहत, पूरा गुजरात सेक्शन दिसंबर 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जबकि 508 किलोमीटर लंबे पूरे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को दिसंबर 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
भारतीय रेलवे B28 ट्रेन का ट्रायल रन शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। मई-जून 2027 तक अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के सूरत-वापी (100 किमी) खंड का ट्रायल रन किया जा सकता है। इस रूट पर कमर्शियल सेवाएं अगस्त 2027 से शुरू होने की उम्मीद है।
बुलेट ट्रेन की स्पीड समय को ऐसे मात देगी कि लोगों के करीब 4 से साढ़े चार घंटे की बचत होगी। इस ट्रेन में और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी, आइए जानते हैं।
- बुलेट ट्रेन के आने से सबसे बड़ी खास बात होगी कि मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय करीब 6.5 घंटे से घटकर 1 घंटा 58 मिनट ही रह जाएगा।
- इस हाई-स्पीड ट्रेन में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक भी लगी है, जो ब्रेक लगाने के दौरान ऊर्जा वापस हासिल कर लेती है और कुल ऊर्जा दक्षता को बेहतर बनाने में मदद करती है।
- ट्रेन में आठ कोच हैं, जिनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार शामिल हैं। भविष्य में, आठ-आठ कोच वाले दो ट्रेनसेट को जोड़कर 16 कोच वाली ट्रेन के रूप में चलाया जा सकता है।
- इसमें सात स्टैंडर्ड-क्लास कोच हैं जिनमें 3×2 की सीटिंग व्यवस्था है, और एक एग्जीक्यूटिव-क्लास कोच है जिसमें 2×2 की सीटिंग व्यवस्था है। सीटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे आरामदायक हों और उनमें पैर रखने के लिए पर्याप्त जगह (लेगरूम) हो।
- बुलेट ट्रेन को अधिकतम 280 किमी/घंटा की टेस्टिंग स्पीड और 249 किमी/घंटा की ऑपरेटिंग स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है।
- बुलेट ट्रेन में करीब 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता है, जिसमें दिव्यांगजनों या कम गतिशीलता वाले लोगों के लिए विशेष जगह भी शामिल की गई है। वहीं दृष्टिबाधित यात्रियों की मदद के लिए जानकारी देने वाले साइनेज में ब्रेल लिपि का भी इस्तेमाल किया गया है।
- यात्री केबिन और कोच के बीच के हिस्से (वेस्टिब्यूल) में ‘इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट’ लगी हैं, जिनकी मदद से यात्री आपातकालीन स्थिति में ट्रेन क्रू से संपर्क कर सकते हैं।
- सीटों की हर कतार के साथ बड़ी खिड़कियां हैं, जिससे यात्री बाहर के नजारों का आनंद ले सकते हैं।
- वाई-फाई पर आधारित पैसेंजर इन्फोटेनमेंट सिस्टम की मदद से यात्री पहले से लोड किए गए मनोरंजन और अन्य जानकारीपूर्ण कंटेंट का आनंद ले सकते हैं।
- ट्रेन के कोच आपस में सील किए गए सिंगल-पीस गैंगवे से जुड़े हैं, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में आसानी से आ-जा सकते हैं।
- दरवाजों में अंदर-बाहर होने वाली सीढ़ियां (रिट्रैक्टेबल स्टेप्स) लगी हैं, जो ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच के गैप को कम करने में मदद करती हैं।
- ट्रेन के दोनों सिरों पर ड्राइवर कैब हैं, जो एक इंटेलिजेंट ऑन-बोर्ड कंट्रोल सिस्टम से लैस हैं। इससे तुरंत निर्णय लेने और ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर के साथ तालमेल बिठाने में मदद मिलती है।
- यात्रियों को ऑडियो के जरिए जानकारी देने के लिए पब्लिक एड्रेस और ऑटोमैटिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगे हैं।
- ट्रेन के अंदर हर जगह LED लाइटिंग लगाई गई है।
- कोच के अंदर लगी LCD स्क्रीन पर अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में जानकारी दिखाई जाती है।
- ट्रेन में हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर-कंडीशनिंग (HVAC) सिस्टम लगा है, जो अंदर के तापमान और नमी को नियंत्रित रखता है, जिससे यात्रियों को आरामदायक माहौल मिलता है। हर कोच में दो HVAC यूनिट लगी हैं।
- ट्रेन की बॉडी और फर्श के ढांचे में साउंड इंसुलेशन (आवाज रोकने वाली तकनीक) का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, शोर को कम करने के लिए विशेष कोटिंग भी की गई है। स्कर्ट, बोगी कवर और फेयरिंग, जो ट्रेन में शोर कम करने के उपायों का हिस्सा हैं।
- सामान रखने के लिए ऊपर की तरफ रैक (ओवरहेड रैक) दिए गए हैं। बड़े बैग और सूटकेस रखने के लिए फर्श पर अलग से लगेज स्टैंड भी हैं।
- ट्रेन में मोबाइल डिवाइस चार्ज करने और लैपटॉप चलाने के लिए पावर आउटलेट दिए गए हैं।
- इसमें आधुनिक बायो-डाइजेस्टर शौचालय हैं, जिन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि उनसे निकलने वाला कचरा कम से कम हो।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट और स्टेशन
508 किलोमीटर लंबा MAHSR कॉरिडोर पश्चिमी भारत के प्रमुख आर्थिक और शहरी केंद्रों को जोड़ेगा। इस बुलेट ट्रेन के मुंबई से अहमदाबाद के बीच 12 स्टेशनों पर स्टॉपेज होंगे।
- मुंबई
- ठाणे
- विरार
- बोइसर
- वापी
- बिलिमोरा
- सूरत
- भरूच
- वडोदरा
- आनंद
- अहमदाबाद
- साबरमती
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