पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। घने बादलों और बारिश के कारण चांद देर से दिखा। चांद के दर्शन के बाद महिलाओं ने पूजा की और व्रत खोला।
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महिलाओं ने दिनभर अन्न और पानी ग्रहण नहीं किया। शाम को पूजा-अर्चना की और व्रत कथा सुनी।
रात में चांद निकलने का इंतजार किया। दर्शन होने पर छलनी से चांद देखा और अर्घ्य दिया। इसके बाद पति का चेहरा देखकर उनका आशीर्वाद लिया और पानी पीकर व्रत खोला।
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महिलाओं ने पारंपरिक कपड़े पहनकर और सोलह श्रृंगार कर पर्व मनाया। घरों में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान हुए।

