
बहराइच के नानपारा तहसील के प्राथमिक विद्यालय कोयलाहवा में शुक्रवार को शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और उनके प्रति सम्मान जताया। विद्यालय का माहौल गुरु-शिष्य परंपरा और शिक्षा के महत्व से भरा रहा। शिक्षक दिवस पर स्कूल के अध्यापकों ने बच्चों को शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और मेहनत का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि शिक्षक सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाते, बल्कि बच्चों का व्यक्तित्व बनाने और उनके अच्छे भविष्य की नींव भी रखते हैं। अध्यापकों ने बच्चों को शिक्षकों का सम्मान करने, रोज पढ़ाई करने और अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने को प्रेरित किया। अध्यापकों ने बच्चों को शिक्षक दिवस के इतिहास और इसके महत्व के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल 5 सितंबर को बड़े शिक्षाविद, दार्शनिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। बताया गया कि 1962 में जब डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रपति बने, तब उनके कुछ छात्रों और दोस्तों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई। इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने सुझाव दिया कि उनके जन्मदिन को व्यक्तिगत तौर पर मनाने की बजाय अगर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए, तो उन्हें ज्यादा खुशी होगी। उनके इसी विचार के बाद देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। कार्यक्रम में शिक्षकों ने डॉ. राधाकृष्णन के शिक्षा से जुड़े विचार बच्चों को बताए। उन्होंने कहा कि एक सच्चा शिक्षक बच्चों को सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करता है। शिक्षकों ने बच्चों से जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने और लगातार सीखते रहने को कहा। आखिर में विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों को शिक्षक दिवस की बधाई दी और उनके प्रति सम्मान जताया।
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