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भर्ती घोटाले में बोरघरिया पर शिकंजा! खाते में जमा मिले 66.64 लाख, पूर्व सीएम बघेल के OSD से जुड़ा मामला

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रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती गड़बड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बड़ा खुलासा किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी का दावा है कि बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पदस्थ अपर कलेक्टर एवं पूर्व मुख्यमंत्री के तत्कालीन ओएसडी चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से ₹66.64 लाख की नकद धनराशि जमा कराई गई थी।

पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर बटोरे 3 करोड़ से अधिक

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2021 के दौरान उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों को परीक्षा उत्तीर्ण कराने व प्रश्नपत्र मुहैया कराने का भरोसा देकर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध उगाही की। इस पूरे खेल में तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत ओएसडी चेतन बोरघरिया के प्रशासनिक प्रभाव और नाम का इस्तेमाल किया गया।

जब्त किए गए डिजिटल डिवाइसेज की फॉरेंसिक पड़ताल में बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच वित्तीय लेनदेन, रुपयों की मांग तथा राशि वापसी से संबंधित चैट और सबूत मिले हैं। इसके साथ ही मेसर्स फिगरकेव ई-कॉम (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से काली कमाई की शेल मनी लॉन्ड्रिंग और लेयरिंग किए जाने का भी संदेह है।

मैरिज पैलेस में पेपर लीक और रिसॉर्ट में स्पेशल कोचिंग

ईडी की तफ्तीश में सामने आया कि अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा से पूर्व रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे। इसके पश्चात परीक्षार्थियों को बरनवापारा अभयारण्य स्थित एक गुप्त रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के लीक पर्चों के आधार पर विशेष कोचिंग दी गई। अपराध से अर्जित काली कमाई को छिपाने, लेन-देन करने और इस्तेमाल में प्रत्यक्ष संलिप्तता मिलने पर ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत 11 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया।

2020 से 2022 की भर्तियों में रसूखदारों को फायदा पहुँचाने का आरोप

यह पूरा प्रकरण वर्ष 2020 से 2022 के मध्य आयोजित की गई विभिन्न शासकीय भर्ती प्रक्रियाओं से संबंधित है। आरोप है कि मेधावी अभ्यर्थियों को दरकिनार कर राजनीतिक व प्रशासनिक रसूख रखने वाले घरानों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी व अन्य उच्च राजपत्रित पदों पर चयनित किया गया।

राज्य सरकार की अनुशंसा पर सीबीआई भी इस मामले में समानांतर जांच चला रही है। सीबीआई पूर्व में सीजीपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी, डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन और चार चयनित अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चुकी है। उधर, ईडी ने भी इस सिंडिकेट की जांच के सिलसिले में विवादित अभ्यर्थियों, एनजीओ, रिसॉर्ट संचालकों व कॉरपोरेट से जुड़े लगभग 30 लोगों को समन जारी कर तलब किया है।

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