महराजगंज के फरेन्दा इलाके के सेमरामहाराज गांव में मंगलवार को विराट दंगल कुश्ती हुई। इसमें दूर-दूर से आए दर्जनों पहलवानों ने अपनी ताकत और हुनर दिखाया। सुबह से ही मैदान दर्शकों से भरा रहा। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने तालियां बजाकर मुकाबलों का मजा लिया। मुख्य मुकाबलों में स्थानीय और पड़ोसी जिलों के पहलवानों के बीच कड़ी टक्कर हुई। युवा पहलवानों ने अपनी तेज चाल और पकड़ से दर्शकों को खूब पसंद आए। वहीं, अनुभवी पहलवानों ने मुकाबलों को दिलचस्प बनाए रखा। आयोजकों और ग्राम प्रधानों ने बताया कि यह दंगल पुरानी परंपरा को जिंदा रखने और युवाओं को अच्छी गतिविधियों से जोड़ने के लिए किया गया। एक आयोजक ने कहा कि वे चाहते हैं कि गांव की पुरानी खेल परंपराएं बची रहें और नई पीढ़ी इनका सम्मान करे। कुश्ती के साथ रंगीन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत से माहौल और अच्छा हो गया। मेले में फूलदानी, लोकल खाने के स्टॉल और पारंपरिक खेल भी लगे थे। इससे गांव के लोगों में एकता और उत्सव का माहौल दिखा। विजेताओं को नकद इनाम और सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया। एक वरिष्ठ पहलवान और जिला खेल समन्वयक ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम स्थानीय युवाओं को अनुशासन और शारीरिक मजबूती देते हैं। हालांकि, समय के साथ गांवों में पुराने अखाड़ों और नियमित कुश्ती की परंपरा कम हो रही है। पहले कई गांवों में युवा सुबह-शाम अखाड़े में अभ्यास करते थे। वहीं से कई बड़े पहलवान भी निकले थे। लेकिन आज शहरीकरण, नौकरी के रुझान और दूसरी आधुनिक चीजों के कारण यह परंपरा कम हो गई है। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से युवाओं की रुचि फिर से जगाने की कोशिश जारी रहेगी। स्थानीय पंचायतें भी अखाड़ों को फिर से शुरू करने पर सोच रही हैं। आज के दंगल ने दिखाया कि ग्रामीण खेल संस्कृति अभी भी जिंदा है। इसे गांव वालों की मदद से बचाया जा सकता है। आयोजकों ने बताया कि आने वाले सालों में वे और बड़े स्तर पर टूर्नामेंट कराने की योजना बना रहे हैं।
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