Home लेटेस्ट न्यूज़ झीरम घाटी कांड में फैसला आज, कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने न्याय...

झीरम घाटी कांड में फैसला आज, कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने न्याय को लेकर रखी बात

0
4
News Desk

बस्तर | छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध बस्तर संभाग में हुए चर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए (NIA) विशेष न्यायालय में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि इस मामले में आज यानी 31 अगस्त को अदालत का ऐतिहासिक फैसला आ सकता है। हालांकि, घटना के 13 साल बीत जाने के बाद भी इस संवेदनशील मसले पर राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है और फैसला आने से ठीक पहले एक बार फिर से सूबे की सियासत पूरी तरह गरमा गई है।

'एनआईए की जांच सही दिशा में नहीं हुई' — भूपेश बघेल

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने झीरम घाटी कांड के संभावित फैसले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा बयान दिया है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल का स्पष्ट आरोप है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और सही तरीके से जांच नहीं की है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि दरभा थाने में जिन लोगों के नाम पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी, उनसे तक पूछताछ नहीं की गई। एनआईए कोर्ट ने गुड्सा उसेंडी से औपचारिक बयान दर्ज करने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उसका बयान नहीं लिया गया। इसके अलावा, घटना के वक्त झीरम घाटी में मौके पर मौजूद रहे कई अन्य लोगों से भी गवाही या पूछताछ नहीं की गई। इस खौफनाक कांड के असली षड्यंत्रकारियों (Conspirators) तक पहुँचने के लिए कोई ठोस प्रयास ही नहीं किए गए। जब शुरुआती जांच ही त्रुटिपूर्ण और लीपापोती से भरी होगी, तो अदालत के सामने पेश की गई रिपोर्ट और उसके आधार पर आने वाले फैसले पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

'भाजपा मामले को दबाने का कर रही है प्रयास'

भूपेश बघेल ने आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि जब वे राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री से यह साफ कहा था कि यदि केंद्र सरकार या उनकी एजेंसियां सही ढंग से जांच नहीं कर पा रही हैं, तो यह केस राज्य सरकार को सौंप दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनकी सरकार ने इस मामले की स्वतंत्र जाँच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया, तो एनआईए तुरंत उच्च न्यायालय (High Court) पहुँच गई। इसके बाद जब कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आया, तब तक प्रदेश में उनकी सरकार का कार्यकाल समाप्त हो चुका था। उनके जाने के बाद सत्ता में आई वर्तमान भाजपा सरकार ने न तो नए सिरे से जांच के कोई आदेश दिए और न ही इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया, जिससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा इस गंभीर मामले को दबाने का षड्यंत्र रच रही है।

क्या है पूरा झीरम घाटी मामला?

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के दरभा घाटी के जंगलों में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने कांग्रेस पार्टी के परिवर्तन यात्रा के काफिले पर एक अत्यंत घातक, सुनियोजित और वीभत्स हमला किया था। प्रतिबंधित नक्सलियों द्वारा किए गए इस अंधाधुंध हमले में 'बस्तर टाइगर' के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता विद्याचरण शुक्ल, विधायक उदय मुदलियार समेत कई दिग्गज नेता और सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच लंबे समय से एनआईए द्वारा की जा रही थी, जिस पर अब अदालत का बहुप्रतीक्षित फैसला आना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here