चंडीगढ़ | पंजाब की जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। लगभग दो महीने पहले मनजीत का अपहरण करने के बाद उन्हें एक पेड़ से बांधकर बेरहमी से जिंदा जला दिया गया था, जिसके बाद से उनका लगातार अस्पताल में इलाज चल रहा था। आखिरकार, करीब 54 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। इस सनसनीखेज मौत के बाद अब पुलिस की जांच और व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बीच, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मनजीत की पोस्टमार्टम (ऑटोप्सी) रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि वह घटना के वक्त 7 हफ्ते की गर्भवती थीं।
क्या है पूरा मामला?
28 वर्षीय मनजीत कौर का बीते 3 जुलाई को चंडीगढ़ के सेक्टर 34 इलाके से अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद आरोपी उन्हें जबरन मोरिंडा ले गए, जहाँ एक पेड़ से बांधकर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। इस वीभत्स घटना में वह बुरी तरह झुलस गई थीं। डॉक्टरों के अनुसार, उनके शरीर का 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था।
लगभग 54 दिनों तक अस्पताल में गंभीर हालत में इलाज चलने के बाद 26 अगस्त को उनकी मौत हो गई। मृतका की माता कांता देवी की औपचारिक शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कर अपनी छानबीन शुरू कर दी है। घटना के बाद से मनजीत कई हफ्तों तक गहरे सदमे और अचेतन अवस्था में थीं, लेकिन गत 5 अगस्त को जब उन्हें थोड़ा होश आया, तो उन्होंने अपने परिजनों को इस पूरी खौफनाक वारदात के बारे में विस्तार से बताया था।
पुलिस की कार्यप्रणाली और ढिलाई पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे प्रकरण को लेकर अब स्थानीय पुलिस प्रशासन भारी आलोचनाओं के घेरे में आ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब मनजीत कौर होश में आने के बाद बोलने और बयान देने की स्थिति में थीं, तब पुलिस ने उनका आधिकारिक बयान दर्ज क्यों नहीं किया?
परिजनों ने मीडिया को जानकारी दी कि मनजीत खुद पुलिस के सामने अपना बयान दर्ज कराना चाहती थीं और इस बात की आधिकारिक सूचना अस्पताल प्रबंधन की तरफ से भी समय रहते स्थानीय पुलिस को दे दी गई थी। इसके बावजूद, पुलिस का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनका बयान दर्ज करने के लिए अस्पताल नहीं पहुँचा, और अंततः 26 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
परिवार और पुलिस की आगे की जांच
मृतका मनजीत कौर का अपनी शादी के बाद पूर्व पति से तलाक हो चुका था। वह अपने पीछे 7 साल का एक मासूम बेटा छोड़ गई हैं, जो फिलहाल अपने पिता के पास रहता है।
फिलहाल, चंडीगढ़ पुलिस इस पूरे मामले में चश्मदीद गवाहों के बयानों, डिजिटल साक्ष्यों, आसपास के तमाम सीसीटीवी फुटेज और मनजीत की कॉल डिटेल्स व अन्य संपर्कों की बेहद बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस इस पहलू पर भी गहराई से तालमेल बिठा रही है कि घटना के वक्त अन्य संदिग्धों की क्या भूमिका थी और इस खौफनाक साजिश के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे।

























