ग्वालियर | मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से साइबर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता को हैरान कर दिया है. स्थानीय पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए बताया कि ग्वालियर के विभिन्न वेंडरों के माध्यम से जारी किए गए फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर देश के 12 अलग-अलग राज्यों में 180 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया और कुल 14 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ऐंठी गई. इस अंतरराज्यीय ठग गिरोह का जाल केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देश के एक दर्जन राज्यों तक फैले हुए थे.
एनसीआरपी (NCRP) के डेटा से खुलासे और 'ऑपरेशन फास्ट'
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि ठगी की वारदातों में इस्तेमाल किए गए तमाम सिम कार्ड ग्वालियर शहर के ही अलग-अलग मोबाइल वेंडरों से खरीदे या जारी करवाए गए थे. जब नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के डेटा का गहन विश्लेषण किया गया, तो इस खतरनाक नेटवर्क की परतें एक-एक कर उधड़ती चली गईं. इसके बाद पुलिस ने 'ऑपरेशन फास्ट' का आगाज किया और फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले संदेस्पद वेंडरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी.
इस तरह दिया जाता था वारदातों को अंजाम
पुलिस की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि दिसंबर 2025 के दौरान आम नागरिकों के मूल दस्तावेज और बायोमेट्रिक विवरण लेकर उनकी जानकारी के बिना चुपचाप फर्जी सिम कार्ड जारी करवा लिए गए थे. इन अवैध सिमों का इस्तेमाल मुख्य रूप से दिसंबर 2025 से लेकर अगस्त 2026 के बीच बड़े पैमाने पर साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया गया. जांच में यह भी तथ्य सामने आया है कि जिन भोले-भाले लोगों के नाम पर ये सिम कार्ड निकाले गए थे, उनमें से कई को तो इस बात की भनक तक नहीं थी कि उनके नाम का दुरुपयोग हो रहा है.
12 राज्यों तक फैला हुआ था ठगों का यह नेटवर्क
साइबर अपराधियों ने अपने इस आपराधिक साम्राज्य का विस्तार मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, बिहार, केरल, चंडीगढ़ और हरियाणा समेत कुल 12 राज्यों के विभिन्न प्रमुख शहरों तक कर रखा था. देश के इन तमाम राज्यों के शहरों में ग्वालियर से ही खपाए गए फर्जी सिम कार्ड्स के माध्यम से वित्तीय धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दिया गया था.
फिलहाल, ग्वालियर पुलिस अब इन सिम कार्डों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल बिचौलियों और एजेंटों के जरिए उन मुख्य साइबर ठगों तक पहुँचने की पुरजोर कोशिश कर रही है, जिन्होंने इन फर्जी नंबरों का इस्तेमाल कर देश के अलग-अलग हिस्सों में करोड़ों रुपयों की अवैध कमाई की है.





























