चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ बनाने की मांग, CM विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र; दक्षिण भारत के राज्यों को होगा फायदा

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की स्थायी पीठ स्थापित करने की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाने और स्थायी पीठ की स्थापना के लिए अनुकूल निर्णय कराने की अपील की है। विजय का कहना है कि चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ बनने से केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के सभी राज्यों के लोगों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि देश के संघीय ढांचे की वास्तविक भावना के अनुरूप न्यायपालिका तक सभी नागरिकों की समान पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने की मांग वर्ष 1980 से उठाई जा रही है। इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।

दिल्ली पहुंचने में दक्षिण भारत के लोगों को होती है परेशानी

विजय ने पत्र में दक्षिण भारत के राज्यों से दिल्ली की दूरी को एक बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्याय पाने के लिए इन राज्यों के लोगों को लंबी दूरी तय करके नई दिल्ली आना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद होता है, बल्कि यात्रा और मुकदमेबाजी पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाता है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए कहा कि यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के संरक्षण और उनके प्रवर्तन के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है।

संविधान निर्माताओं का उद्देश्य था कि यह अधिकार अमीर और गरीब, हर नागरिक के लिए समान रूप से सुलभ हो। हालांकि, समय के साथ यह व्यवस्था व्यावहारिक रूप से उन लोगों के लिए अधिक आसान हो गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के नजदीक रहते हैं और यात्रा व मुकदमे का खर्च उठा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि दक्षिण भारत के नागरिक भौगोलिक दूरी और आर्थिक चुनौतियों के कारण न्याय पाने के इस संवैधानिक अधिकार का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

1862 से है मद्रास हाई कोर्ट की कानूनी विरासत

चेन्नई में स्थायी पीठ की वकालत करते हुए विजय ने मद्रास हाई कोर्ट की ऐतिहासिक और कानूनी विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मद्रास हाई कोर्ट देश के सबसे पुराने चार्टर्ड हाई कोर्ट में से एक है, जिसकी स्थापना वर्ष 1862 में हुई थी। यहां की बार की पेशेवर क्षमता और कानूनी विशेषज्ञता भी इस शहर को सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठ के लिए उपयुक्त बनाती है।

उन्होंने कहा कि चेन्नई की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां स्थापित पीठ दक्षिण भारत के सभी राज्यों के लोगों के लिए सुविधाजनक साबित हो सकती है।

2007 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्ताव पर जताई थी असहमति

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के फुल कोर्ट की 7 अगस्त 2007 को हुई बैठक का भी जिक्र किया। इस बैठक में कोर्ट ने क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपने पुराने फैसलों से अलग हटने का कोई औचित्य नहीं माना था। यह स्थिति तब थी, जब तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए आवासीय सुविधाओं समेत आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।

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