अतुल कुमार श्रीवास्तव | लक्ष्मीपुर(महाराजगंज), महराजगंज3 घंटे पहले
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क्षेत्र में बुधवार को हलषष्ठी (हलछठ/हरछठ) पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा। सुबह से ही घरों और पूजा स्थलों पर महिलाओं की चहल-पहल रही। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने हलषष्ठी माता की कथा सुनी और भगवान बलराम का स्मरण कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की।
संतान की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत
हलषष्ठी पर्व को संतान की दीर्घायु और उनके सुखमय जीवन से जोड़कर देखा जाता है। महिलाओं ने अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य और परिवार में सुख-शांति की कामना के साथ व्रत रखा। पर्व को लेकर सुबह से ही महिलाओं में खास उत्साह नजर आया।
पूजा स्थल सजाकर की हलषष्ठी माता की पूजा
व्रती महिलाओं ने घरों और पूजा स्थलों की साफ-सफाई कर उन्हें पारंपरिक तरीके से सजाया। इसके बाद विधि-विधान से हलषष्ठी माता की पूजा-अर्चना की गई। पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की खुशहाली और संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना की।
समूह में जुटीं महिलाएं, सुनी पर्व की कथा
कई स्थानों पर महिलाएं समूह में एकत्र हुईं और सामूहिक रूप से पूजा-पाठ किया। इस दौरान हलषष्ठी व्रत की कथा सुनी गई। धार्मिक अनुष्ठान और कथा के चलते पूरे क्षेत्र में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से पर्व की पूजा पूरी की।
भगवान बलराम का किया स्मरण
हलषष्ठी पर्व का संबंध भगवान बलराम से भी माना जाता है। पूजा के दौरान महिलाओं ने भगवान बलराम का स्मरण कर संतान के स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना की। मान्यता के अनुसार यह पर्व माताओं की आस्था और संतान के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।
हल से जुड़ी फसलों से परहेज की परंपरा
व्रत के दौरान खान-पान को लेकर भी विशेष परंपराओं का पालन किया गया। मान्यता के अनुसार हलषष्ठी के व्रत में हल से जुती जमीन में पैदा होने वाले अनाज और कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता है। महिलाओं ने अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नियमों का पालन करते हुए व्रत रखा।
दिनभर बना रहा भक्तिमय माहौल
हलषष्ठी को लेकर पूरे क्षेत्र में दिनभर आस्था और भक्ति का माहौल रहा। महिलाओं ने पूजा-अर्चना और कथा श्रवण के बाद संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पर्व के चलते घरों से लेकर पूजा स्थलों तक धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलीं।































