इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। भारी संख्या में युवाओं के जुटने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और आयोजकों को कुल 31 बिंदुओं वाली सख्त शर्तों का एक विस्तृत निर्देश पत्र सौंपा है।
सुरक्षा के कड़े और व्यापक इंतजाम
पुलिस प्रशासन द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाने अनिवार्य हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए गए हैं:
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स्वयंसेवकों की तैनाती: कार्यक्रम स्थल पर अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों को लगभग 1500 स्वयंसेवकों को तैनात करना होगा।
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प्रवेश और निकास द्वार: भीड़ के सुगम आवागमन के लिए कार्यक्रम स्थल पर कम से कम 6 प्रवेश द्वार और 8 निकास द्वार बनाए जाने के निर्देश हैं।
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सीसीटीवी निगरानी: सुरक्षा पर पैनी नजर रखने के लिए 40 आधुनिक नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
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आपातकालीन निकासी: किसी भी अप्रिय या आपात स्थिति से निपटने के लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरी भीड़ अधिकतम 12 मिनट के भीतर सुरक्षित तरीके से बाहर निकाली जा सके।
मंच से लेकर पार्किंग तक अलग-अलग योजनाएं
पुलिस ने मंच, वीआईपी क्षेत्र, वाहन पार्किंग, बैरिकेडिंग, प्रवेश पास प्रणाली, आगंतुकों की तलाशी, मेडिकल सहायता और आपातकालीन निकास मार्गों के लिए अलग-अलग योजनाएं तैयार करने को कहा है। इन सभी व्यवस्थाओं में आयोजकों की व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारियों को भी पूरी तरह स्पष्ट किया गया है। कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे को पुलिस की ओर से इन सभी शर्तों की सूची आधिकारिक रूप से सौंप दी गई है।
ऐतिहासिक घटनाओं से सबक और आयोग के संदर्भ
सुरक्षा निर्देशों के साथ पुलिस ने 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुई पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद गठित जस्टिस जेएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का भी विशेष संदर्भ दिया है। आयोग की रिपोर्ट में वीआईपी दौरों और कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, कार्यक्रम स्थल के चयन और आयोजकों की भूमिका के विभिन्न पहलुओं की गहराई से जांच की गई थी। जांच में यह स्पष्ट हुआ था कि ऐसे आयोजनों में पुलिस और आयोजकों के बीच बेहतर आपसी समन्वय होना बेहद जरूरी है, अन्यथा छोटी सी लापरवाही भी बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।
इंदौर पुलिस ने इन्हीं ऐतिहासिक तथ्यों और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए आयोजकों को सख्त हिदायत दी है कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






















