पीटीआई, नई दिल्ली। भारत की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती दे रही है। पिछले 15 वर्षों में कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) की नई रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दशक में भारत की नवीकरणीय बिजली क्षमता लगभग चार गुना हो गई है। 2026 में यह 300 गीगावाट के पार पहुंच गई, जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार बन गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 530 गीगावाट हो सकती है। हालांकि इसके लिए सहायक बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश करना होगा।
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के दौरान जारी ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा बाजार रिपोर्ट 2026’ के अनुसार भारत ने निर्धारित समय से पांच साल पहले 2025 में ही बिजली उत्पादन क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन का लक्ष्य हासिल कर लिया।
नवीकरणीय बिजली उत्पादन से 2011 से 2025 के बीच कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब अमेरिकी डालर से अधिक की बचत हुई।
आइईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के समय भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़े लाभ दे रहा है।
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए घरेलू विनिर्माण, निवेश और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
