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बारिश से धान की फसल खेतों में गिरी:बस्ती के शंकरपुर में कटाई रुकी, फसल सड़ने का खतरा

बस्ती के विक्रमजोत क्षेत्र के शंकरपुर में बेमौसम बारिश और तेज हवा से खेतों में खड़ी तैयार धान की फसल गिर गई है। लगातार बारिश के कारण किसान कटाई नहीं कर पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि कभी बाढ़, कभी सूखा, कभी आग तो कभी बेमौसम बारिश से फसल पर असर पड़ता है। साल भर की मेहनत के बाद जब फसल घर लाने का समय आता है, तब मौसम की मार झेलनी पड़ती है।
फसल पककर तैयार है, लेकिन खेत में गिरी धान के सड़ने का खतरा है। किसानों ने खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। पूरे परिवार की उम्मीद इसी फसल पर टिकी है।
किसानों के मुताबिक, अगर बारिश जारी रही तो उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।

वाराणसी – नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का इंतजार खत्म, शनिवार से चलेगी ट्रेन

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वाराणसी-नई दिल्ल वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। शनिवार, 31 अक्टूबर से ट्रेन आम यात्रियों के लिए शुरू की जा रही है। यह ट्रेन उत्तर प्रदेश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सर्विस है।

वाराणसी – नई दिल्ल वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रात करीब 9 बजे वाराणसी से रवाना होकर सुबह करीब 6 बजे नई दिल्ली पहुंचने वाली यह ट्रेन यात्रियों को रात भर आरामदायक सफर का मौका देगी।

इन शहरों को मिलेगी फास्ट कनेक्टिविटी

छात्रों, प्रोफेशनल्स, व्यापारियों और परिवारों के लिए यह बेहद सुविधाजनक विकल्प साबित होगी। प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद में ठहराव के साथ यह सेवा रेल कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाएगी। काशी आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए भी यह यात्रा आसान और सुखद बनाने वाली है।

बता दें इस रूट पर साल 2019 से वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए, इस स्लीपर ट्रेन में आरामदायक बर्थ, चार्जिंग पॉइंट, आधुनिक शौचालय, सामान रखने के लिए अलग जगह और सीसीटीवी निगरानी की सुविधा होगी।

दिल्ली-वाराणसी सफर को बनाएगी आसान

यह नई ट्रेन तीर्थयात्रियों, पर्यटकों, छात्रों और परिवारों के लिए नई दिल्ली और काशी के बीच सफर को आसान बना देगी। वाराणसी अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण पूरे देश से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

यहां काशी विश्वनाथ मंदिर, प्रसिद्ध गंगा आरती और ऐतिहासिक घाट मौजूद हैं। पर्यटक यहां सारनाथ, पारंपरिक बाजारों और शहर के मशहूर स्थानीय खान-पान का भी आनंद ले सकते हैं।

वाराणसी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) भी स्थित है, जो इसे छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र बनाता है।

इस तरह, रात भर चलने वाली यह सेवा उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है जो धार्मिक यात्रा, शिक्षा, व्यापार या पारिवारिक कार्यों के लिए सफर करते हैं।

कौन-कौन से स्टेशन पर रुकेगी ट्रेन?

वाराणसी – नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों जैसे प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद में रुकेगी।

इन पड़ावों के साथ, नई वंदे भारत स्लीपर सेवा से उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों और राष्ट्रीय राजधानी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए रात भर की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

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Power Outage in Nasirganj Due to 33KV Line Fault

श्रावस्ती के जमुनहा ब्लॉक में लक्ष्मणनगर बिजली उपकेंद्र से जुड़े नासिरगंज और आसपास के इलाकों में सुबह पांच बजे से बिजली बंद है। बारिश के चलते 33 केवी लाइन में खराबी आई।

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शाम होते ही नासिरगंज बाजार में अंधेरा छा गया। बिजली न होने से बाजारों में सन्नाटा रहा और दुकानदारों को दुकानें जल्दी बंद करनी पड़ीं। बिजली से चलने वाले घरेलू काम भी प्रभावित हुए।

स्थानीय लाइनमैन करण सिंह ने बताया कि 33 हजार वोल्ट की 33 केवी लाइन में तकनीकी खराबी के कारण बिजली बंद हुई है। उन्होंने कहा कि मौसम ठीक होते ही मरम्मत शुरू कराकर जल्द बिजली बहाल करने की कोशिश की जाएगी।

INS विक्रांत पर राफेल मरीन की सफल लैंडिंग, हिंद महासागर में बढ़ेगी नौसेना की ताकत

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 29 अक्टूबर को फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल मरीन ने भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर पहली बार सफल लैंडिंग की। खास बात यह रही कि यह लैंडिंग अपने पहले ही प्रयास में पूरी तरह सटीक और सफल रही।

यह लैंडिंग, भारतीय नौसेना में इन विमानों को शामिल करने से पहले, उन्हें नौसेना के विमानवाहक पोत ऑपरेशंस में एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गोवा में चल रहे हैं विशेष फ्लाइट ट्रायल

सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना इस समय गोवा में राफेल मरीन के गहन फ्लाइट ट्रायल कर रही है। इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि INS विक्रांत के डेक और स्की-जंप सिस्टम से संचालन को पूरी तरह अनुकूल बनाने के लिए विमान में क्या तकनीकी समायोजन या बदलाव आवश्यक हैं। यह प्रक्रिया विमान और युद्धपोत के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

भारत-फ्रांस राफेल डील

भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए भारत ने फ्रांस के साथ लगभग 63,000 करोड़ रुपये का बड़ा रक्षा समझौता किया था।

इस सौदे के तहत कुल 26 राफेल मरीन जेट मिलेंगे, जिनमें 22 सिंगल सीट फाइटर जेट और 4 ट्वीन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं।इन विमानों की डिलीवरी 2030 तक पूरी होने की उम्मीद है। इस दौरान नौसेना के पायलट और तकनीकी दल फ्रांस और भारत में व्यापक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

समझौते में अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण भी शामिल है, जिससे भारत अपने स्वदेशी हथियारों को इस जेट में एकीकृत कर सकेगा।

इस डील के तहत भारत में राफेल के फ्यूजलेज का निर्माण होगा, साथ ही इंजनों, उन्नत सेंसरों और हथियारों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल की सुविधाएं भी देश में ही स्थापित की जाएंगी।

नौसेना के लिए राफेल मरीन जेट क्यों महत्वपूर्ण

राफेल मरीन जेट भारतीय नौसेना की विमानवाहक पोत-आधारित वायु शक्ति को मजबूत करेंगे। ये विमान हवाई सुरक्षा में मदद करेंगे और समुद्र तथा जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ हमले करने में सक्षम होंगे।

मौसम बदलने से 100 से ज्यादा मरीज इमरजेंसी पहुंचे:महराजगंज के जिला अस्पताल में पेट दर्द और बुखार की शिकायतें बढ़ीं, डॉक्टर ने साफ पानी पीने की दी सलाह

मौसम में अचानक बदलाव के बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में 100 से ज्यादा मरीज पहुंचे। इनमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा मरीज पेट दर्द और बुखार की शिकायत लेकर आए। डॉक्टर ऋषि चौधरी के मुताबिक, मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मौसम बदलने से लोगों को दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं। चौधरी ने ताजा और साफ खाना खाने, साफ पानी पीने और खानपान में सावधानी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बुखार, पेट दर्द या दूसरी परेशानी होने पर खुद से दवा न लें और डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर ने साफ पानी पीने की भी सलाह दी।

तरैनी खदरा में दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई:कप्तानगंज ब्लॉक में भंडारा हुआ; विधायक समेत हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया

बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के तरैनी खदरा गांव में दुर्गा प्रतिमा स्थापना और भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें विधायक अतुल चौधरी समेत हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। गांव के वासदेव यादव ने श्री श्री दुर्गा जी की मूर्ति स्थापित कराई। इसके बाद पूजा-अर्चना हुई। भंडारे में दूर-दराज के गांवों से भी लोग पहुंचे और पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद लिया। आयोजकों ने बताया कि व्यवस्था संभालने में स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने मदद की। कार्यक्रम में पहुंचे विधायक अतुल चौधरी ने माता रानी के दरबार में मत्था टेका और प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने माता रानी से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और भक्तों के कल्याण की कामना की। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन से आपसी भाईचारा और सामाजिक एकता मजबूत होती है। तरैनी खदरा में देर तक चले भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

हिमालय में फिर बढ़ रहा खतरा, 3 लाख लोगों पर मौत का साया; रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिमालयी क्षेत्रों में अनियंत्रित और तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों ने पहाड़ों के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर संकट में डाल दिया है।

एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, इस अंधाधुंध विकास के कारण कम से कम 3 लाख लोग संभावित प्राकृतिक आपदाओं के सीधे खतरे में आ चुके हैं।

साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशिक शोध के मुताबिक, उत्तरी नेपाल, दक्षिण-पूर्वी तिब्बत और भारत के उत्तराखंड के संवेदनशील इलाकों में साल 2016 से 2023 के बीच जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्माण 45% तक बढ़ गया है। वहीं ग्लेशियर झीलों के फटने के खतरे वाले क्षेत्रों में तो निर्माण की रफ्तार 78% दर्ज की गई है।

वास्तविक खतरा अनुमान से कहीं ज्यादा

ब्रिटेन, नेपाल और भारत के नौ शोधकर्ताओं के एक दल ने हिमालयी नदियों के बहाव क्षेत्र में नदी से 50 किलोमीटर नीचे तक के इलाकों और लगभग 1360 ग्लेशियर झीलों के आस-पास बने ढांचों का गहन विश्लेषण किया।

अध्ययन में पाया गया कि नियमों की अनदेखी के चलते खतरे वाले क्षेत्रों में होटल, रिसॉर्ट, रियल एस्टेट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स खड़े किए जा रहे हैं।

वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि प्राकृतिक आपदा के सीधे दायरे में रहने वाले लोगों की वास्तविक संख्या 3 लाख के आंकड़े से कहीं अधिक हो सकती है।

आपदाओं के हालिया घाव

यह अध्ययन अगस्त महीने में नेपाल में आई उस विनाशकारी बाढ़ से पहले पूरा किया गया था, जिसमें 1400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और हजारों लापता हो गए थे। इसके बाद भी इस क्षेत्र में लगातार आपदाएं आ रही हैं।

11 अक्टूबर को बूढ़ी गंडकी नदी में आई अचानक बाढ़ से 200 से अधिक घर तबाह हो गए, पांच महत्वपूर्ण पुल बह गए और कई लोग लापता हो गए। ऊंचाई वाले संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश से मिट्टी और विशाल चट्टानें खिसकने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

नेपाल से उत्तराखंड तक: खतरे की जद में कौन-से इलाके?

उत्तराखंड में नदियों के संवेदनशील तटों और संकरी पहाड़ी घाटियों में मकान, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े कर दिए गए हैं। बाढ़ संभावित और भूस्खलन वाले क्षेत्रों में अनियोजित निर्माण को लेकर विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जताई है।

नेपाल के उत्तरी हिस्से में नदियों के किनारे अनियंत्रित बस्तियां और पर्यटन सुविधाएं विकसित हुई हैं। पोखरा, अन्नपूर्णा क्षेत्र और बूढ़ी गंडकी, त्रिशूली और मोदी नदियों के आसपास के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में हिमनद झीलों और हिमालयी नदियों के करीब बस्तियां बसने से अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

अध्ययन में शामिल झीलों के आसपास का इलाका अत्यधिक संवेदनशील है। तापमान बढ़ने या भूस्खलन से इन झीलों के टूटने पर निचले इलाकों में भारी तबाही मच सकती है।

सख्त नियमों के अभाव में बढ़ रहा संकट

शोधकर्ताओं के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण संबंधी कड़े नियमों के अभाव और मौजूदा दिशानिर्देशों का ठीक से पालन न होने के कारण खतरे वाले जोन में बस्तियां लगातार फैल रही हैं।

यदि समय रहते इन संवेदनशील घाटियों में कड़े कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में जान-माल का नुकसान और विकराल रूप ले सकता है।

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ट्रांसफार्मर गिरने के बाद खाले कठौतिया में बिजली बंद:एक महीने से बिजली बहाल नहीं, ग्रामीणों ने नया ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की

श्रावस्ती के गिलौला पावर हाउस फीडर के तहत आने वाले ग्राम पंचायत कन्लायनपुर के मजरा खाले कठौतिया में एक महीने से बिजली बंद है। गांव के किनारे लगा ट्रांसफार्मर तेज आंधी-तूफान के दौरान पेड़ गिरने से बिजली के पोल समेत जमीन पर गिर गया था।
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब एक महीने पहले आई आंधी-तूफान में ट्रांसफार्मर पर पेड़ गिरा था। इससे बिजली के पोल टूटकर ट्रांसफार्मर समेत जमीन पर गिर गए। बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और दो नए पोल लगाए, लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं लगाया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने और बिजली विभाग की टीम के पहुंचने के बावजूद अब तक नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया है। बिजली बंद होने से रोजमर्रा के कामों में परेशानी हो रही है। मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए भी लोगों को दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है।
रात में घरों में अंधेरा रहता है। इससे बच्चों की पढ़ाई और दूसरे जरूरी कामों पर असर पड़ रहा है। गांव के सालिक राम, नियामत, रक्षाराम वर्मा, हंसराम वर्मा, रामचंदर और महेश चंद्र समेत अन्य ग्रामीणों ने अधिकारियों से जल्द नया ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली बहाल करने की मांग की है।

भारत में सबसे ज्यादा क्या खाया जाता है चिकन, मटन या मछली? रिपोर्ट पर नहीं होगा विश्वास

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में मांसाहारी खाने के पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखा गया है। भारत में मांसाहारी आहार में मछली और सीफूड का इस्तेमाल बहुत बढ़ गया है।

अवर वर्ल्ड इन डेटा पर आधारित 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के मांसाहारी आहार में मछली और सीफूड की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत है, जो 31 प्रतिशत के वैश्वक औसत से काफी ज्यादा है।

ये आंकड़े अलग-अलग देशों में खान-पान की प्राथमिकताओं में अंतर को दर्शाते हैं। ब्राजील में मुर्गे का मांस सबसे प्रमुख है, अर्जेंटीना में बीफ और भैंस के मांस का प्रयोग काफी ज्यादा किया जाता है। जबकि जर्मनी और चीन में पोर्क यानी सूअर का मांस खाने का एक मुख्य हिस्सा है।

भारत के नॉनवेज खाने में मछली का हिस्सा आधे से ज्यादा

आंकड़ों के मुताबिक भारत में खाए जाने वाले नॉनवेज में मछली और सीफूड का योगदान आधे से ज्यादा है। इसमें पोल्ट्री की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत है, जबकि बीफ और भैंस के मांस की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत है। भेड़ और बकरी के मांस का योगदान 11 प्रतिशत है।

इन आंकड़ों के मुताबिक भारत में मांसाहारी भोजन में अन्य प्रकार के मांस की तुलना में मछली और सीफूड की भूमिका ज्यादा अहम है।

भारत और अन्य देशों में खान-पान में अंतर

भारत और अन्य देशों के खान-पान में डेटा में काफी अंतर देखा गया है। ब्राजील में मुर्गे का मांस सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है साथ ही लोग बीफ और भैंस के मांस को भी काफी पसंद करते हैं।

अर्जेंटीना में भी मुर्गे, बीफ और भैंस के मांस को लोग काफी पसंद करते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में पोर्क (सूअर का मांस) के साथ-साथ पोल्ट्री (मुर्गे का मांस) लोगों के खाने का अहम हिस्सा है।

वहीं जापान में मछली और सीफूड की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है। जो वहां के खान-पान के अलग-अलग पैटर्न को दर्शाता है।

भारत की तुलना में जर्मनी और चीन में पोर्क (सूअर का मांस) लोगों की पसंद में सबसे आगे है। इन दोनों देशों में मांस और सीफूड की कुल खपत में सूअर के मांस का एक बड़ा हिस्सा भी शामिल है।

क्या बताते हैं आंकड़े?

यह तुलना दिखाती है कि अलग-अलग देशों में खान-पान की पसंद कैसे अलग-अलग होती है, जो वहां की खाद्य परंपराओं, उपलब्धता और क्षेत्रीय उपभोग के तरीकों से तय होती है। भारत में मछली और सीफूड की हिस्सेदारी काफी अधिक है, जो इसे कई अन्य देशों से अलग बनाती है।

ये आंकड़े सिर्फ मांस और सीफूड की खपत के अनुपात को दर्शाते हैं, न कि प्रति व्यक्ति खपत की कुल मात्रा को। इन आंकड़ों का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति भारी मात्रा में मछली खाता है या भारतीय दुनिया के बाकी देशों से ज्यादा मछली खाते हैं। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में जितना भी मांसाहारी भोजन खाया जाता है उसमें मछली और सीफूड का हिस्सा सबसे ज्यादा है।

सोर्स- ‘आवर वर्ल्ड इन डेटा’ (Our World in Data)

निषाद पार्टी का नौतनवा-फरेंदा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान:पूर्व सांसद प्रवीण निषाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी रणनीति, आगे के कार्यक्रमों की दी जानकारी

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद पार्टी ने महराजगंज की नौतनवा और फरेंदा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का ऐलान किया है। शुक्रवार को फरेंदा पहुंचे पार्टी के पूर्व सांसद प्रवीण निषाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी रणनीति और आगे के कार्यक्रमों की जानकारी दी।
प्रवीण निषाद ने कहा कि पार्टी दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। दीपावली के बाद निषाद समाज का महासम्मेलन होगा। इसके जरिए समाज को एकजुट करने और पार्टी की ताकत दिखाने की योजना है।
उन्होंने निषाद समाज के आरक्षण, सामाजिक भागीदारी और राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा उठाया। प्रवीण निषाद ने कहा कि पार्टी समाज के मान-सम्मान और अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने आगामी चुनाव के लिए समाज की एकजुटता को जरूरी बताया।
फरेंदा सीट से चुनाव की तैयारी कर रहे निशांत त्रिपाठी भी प्रवीण निषाद के साथ मंच पर मौजूद थे। उनकी मौजूदगी के बाद टिकट की दावेदारी को लेकर चर्चा तेज हुई। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
पार्टी के फरेंदा सीट पर चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद टिकट के दूसरे दावेदारों की रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है। अगर गठबंधन में यह सीट निषाद पार्टी को मिलती है, तो पहले से तैयारी कर रहे नेताओं के सामने चुनौती आ सकती है।
फिलहाल सीटों के बंटवारे और प्रत्याशी के नाम पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। दीपावली के बाद होने वाले महासम्मेलन और पार्टी के अगले कदम पर नजर रहेगी। भाजपा से जुड़े और पहले से दावेदारी कर चुके नेताओं की आगे की राजनीति पर भी सवाल हैं।