‘गलत नंबर डायल कर रहे हैं, आपको विरोध-प्रदर्शन करना चाहिए’, कोटा याचिका पर CJI की टिप्पणी

0
3

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र आया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया और इसके बजाय विरोध-प्रदर्शन क्यों नहीं किया?

संसद और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों को अनिवार्य रूप से रोटेट करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, ‘आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं, यह तो विरोध-प्रदर्शनों का दौर है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।’

याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि उनका विरोध करने का कोई इरादा नहीं है, और ऊपर से उनका गला भी खराब है।

आजादी के 7 दशक बाद भी सीट एससी के लिए के लिए आरक्षित क्यों- याचिकाकर्ता

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के 191-कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के एक मतदाता, जगदीश सिंह ने एक याचिका दायर की थी। इनमें उन्होंने इस बात को चुनौती दी थी कि 1952 में हुए पहले चुनाव के बाद से, सात दशकों से भी अधिक समय से यह सीट एससी के लिए के लिए आरक्षित क्यों है।

केवल चार-पांच परिवारों को ही फायदा हुआ- याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे केवल चार-पांच परिवारों को ही फायदा हुआ है। उन्होंने मांग की कि काम से कम अधिकारियों को यह निर्देश दिया जाए कि वे विधानसभा सीटों के आरक्षण के लिए रोटेशन सिस्टम लागू करने पर विचार करें, एक ऐसी व्यवस्था जो पंचायत और नगर निकाय चुनावों में पहले से ही लागू है।

उन्होंने तर्क दिया कि रोटेशन व्यवस्था न होने से संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन होता है। साथ ही, इससे मतदाताओं के पास मौजूद विकल्प भी सीमित हो जाते हैं, क्योंकि वे केवल SC समुदाय के उम्मीदवार को ही चुन सकते हैं।

यह मान लेना सही नहीं है कि मतदान जाति के आधार पर होता- कोर्ट

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह मान लेना सही नहीं है कि मतदान जाति के आधार पर होता है।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह तर्क इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति या समुदाय के आधार पर वोट देगा। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। अदालत लोकतांत्रिक विकल्पों पर कोई न्यायिक फैसला नहीं सुना सकती; यह तय करना मतदाताओं का काम है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निर्वाचन क्षेत्र के आरक्षित होने से किसी व्यक्ति के मतदान के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता।

आपका मतदान का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित- न्यायमूर्ति बागची

उन्होंने कहा कि आपका मतदान का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित है। आप किसी भी समुदाय के उम्मीदवार को वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, यह दावा करना कि आप अपने ही समुदाय के किसी उम्मीदवार को वोट नहीं दे सकते, कोई वैध तर्क नहीं है। इसके अलावा, चुनाव लड़ने का आपका अधिकार किसी एक सीट तक सीमित नहीं है; आप चाहें तो अन्य, गैर-आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों से भी चुनाव लड़ सकते हैं।

यह भी पढ़ें- ‘विरोध के नाम पर किसी जगह पर कब्जा नहीं कर सकते’, दिल्ली में प्रदर्शनों को लेकर CJI की सख्त टिप्पणी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here