डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना ने नई दिल्ली के रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन में स्थित अपने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स वाली 39.5 एकड़ जमीन को औपचारिक रूप से ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ (L&DO) को सौंप दिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास के पास मौजूद इस अहम सरकारी जमीन का हस्तांतरण पूरा हो गया है।
यह जमीन हस्तांतरण ‘जैसी है जहां है’ के आधार पर पूरा किया गया है। अब डिफेंस एस्टेट ऑफिस, एयरफोर् और L&DO की संयुक्त टीम एक विशेष सर्वे करेगी ताकि जमीन के सटीक क्षेत्रफल और सीमांकन का अंतिम मिलान किया जा सके।
गोल्फ कोर्स और स्विमिंग पूल बंद
इस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट और अन्य सुविधाएं थीं। इसे औपचारिक हस्तांतरण से कुछ दिन पहले, पिछले बुधवार को बंद कर दिया गया था।
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले L&DO ने कॉम्प्लेक्स के प्रबंधन को खाली करने का नोटिस जारी किया था, जिसमें जमीन वापस करने का निर्देश दिया गया था।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस कॉम्प्लेक्स के बंद होने की वजह से पूर्व IAF प्रमुख, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, 31 अक्टूबर को अपनी सेवानिवृत्ति से पहले यहाँ पारंपरिक ‘गोल्फिंग-आउट’ समारोह आयोजित नहीं कर सके।
कीमती जमीन वापस लेने का केंद्र सरकार का अभियान
यह हस्तांतरण केंद्र सरकार की उस व्यापक कवायद का हिस्सा है, जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास के आसपास की अहम जमीनों की समीक्षा की जा रही है और उन्हें वापस लिया जा रहा है। इसमें वे भूखंड भी शामिल हैं जिनका इस्तेमाल रक्षा विभाग के गोल्फ कोर्स और खेल सुविधाओं के लिए किया जा रहा था।
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पहले ही संबंधित संस्थाओं को निर्देश दिया था कि वे एयर फोर्स गोल्फ कोर्स वाली जमीन वापस कर दें।
हाल के महीनों में सरकार ने वापस लीं प्रमुख संपत्तियां
अगस्त में L&DO ने लोक कल्याण मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक ‘दिल्ली रेस क्लब’ को बेदखल कर उसकी 53 एकड़ जमीन को अपने नियंत्रण में लिया था।
‘इंडिया पोलो एसोसिएशन’ के अधीन आने वाले ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड को भी सरकार अपने कब्जे में ले चुकी है। इसके पीछे प्रशासनिक जरूरतों, सार्वजनिक उद्देश्यों और रक्षा बुनियादी ढांचा विकास का हवाला दिया गया था।
एयरफोर्स के 39.5 एकड़ स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के इस हस्तांतरण के साथ ही लुटियंस दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के निकटवर्ती क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ जमीन अब सीधे केंद्र सरकार के केंद्रीय भूमि प्रबंधन के अधीन आ गई है।
