मंडी। कीरतपुर-मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश में एक महत्वपूर्ण और अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। राज्य में पहली बार मंडी जिले के थलौट में एक आधुनिक बॉक्स टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाया जा सके।
थलौट में बन रही प्रदेश की पहली बॉक्स टनल
नेशनल हाईवे अथॉरिटी (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के अनुसार, इससे पहले थलौट और औट बाजार के पास फोरलेन को 'कट एंड कवर' तकनीक के जरिए गुजारा गया था। थलौट बाजार में एक और औट बाजार में दो कट एंड कवर बनाए गए थे। हालांकि ये संरचनाएं बॉक्स टनल जैसी ही होती हैं, लेकिन बॉक्स टनल का आकार पूरी तरह चौकोर (स्क्वेयर) होता है। वर्ष 2023 की भीषण आपदा में थलौट बाजार का कट एंड कवर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके बाद एनएचएआई ने यहां बॉक्स टनल का प्रस्ताव तैयार किया और केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब इस पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।
लागत, समय सीमा और ट्रैफिक व्यवस्था
लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली यह 500 मीटर लंबी बॉक्स टनल एक कृत्रिम (आर्टिफिशियल) टनल होगी, जिसे भारी-भरकम ब्लॉक्स के माध्यम से बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक साल का कड़ा लक्ष्य रखा गया है। टनल के निर्माण के बाद कुल्लू-मनाली की ओर जाने वाला सारा ट्रैफिक इसी नए मार्ग से होकर गुजरेगा, जबकि मनाली से आने वाला ट्रैफिक औट की पुरानी टनल का इस्तेमाल करेगा। इस बॉक्स टनल के तैयार होने से औट में बनाई गई नई टनल का संचालन भी सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।
आपदा पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान
वर्ष 2023 की आपदा के दौरान कट एंड कवर को भारी नुकसान पहुंचने के साथ-साथ आसपास के कुछ रिहायशी मकानों को भी क्षति पहुंची थी। एनएचएआई ने इस पूरे नुकसान का सटीक आकलन करते हुए प्रभावित परिवारों के लिए 20 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि मंजूर की है। इसमें से 12 करोड़ रुपये की बड़ी राशि एसडीएम बालीचौकी के पास जमा भी करवाई जा चुकी है, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।
यात्रा के समय में आई भारी कमी
कीरतपुर से मनाली के बीच बन रहे इस बहुप्रतीक्षित फोरलेन का अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है और इस पर वाहनों की आवाजाही भी शुरू कर दी गई है। इस फोरलेन के बनने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां चंडीगढ़ से मनाली पहुंचने में लगभग 8 से 9 घंटे का लंबा समय लगता था, वहीं अब यह दूरी महज 4 से 5 घंटे में तय हो जाती है। आने वाले समय में जब इस फोरलेन के बचे हुए हिस्सों का निर्माण कार्य भी पूरी तरह पूरा हो जाएगा, तो मनाली की यात्रा में लगने वाला समय और भी कम हो जाएगा।












































