जमुनहा में राप्ती नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेज हो गई है। नदी लगातार किनारों को काट रही है, जिससे प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कटान मंदिर के काफी करीब पहुंचने से श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर इस इलाके के लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के महंत बाबा चेतन दास ने बताया कि यह मंदिर लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। महंत ने कहा कि राप्ती नदी हर साल कटान करते हुए मंदिर के करीब पहुंच रही है। अगर समय रहते कटान रोकने के लिए पक्के इंतजाम नहीं किए गए, तो मंदिर को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से मंदिर की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन से राप्ती नदी की कटान रोकने और प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए पक्के इंतजाम करने की मांग की है।
राप्ती नदी की कटान से बंदरहा बाबा मंदिर पर संकट:जमुनहा में जलस्तर घटने से कटान तेज हुई, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों में चिंता बढ़ी
जमुनहा में राप्ती नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कटान तेज हो गई है। नदी लगातार किनारों को काट रही है, जिससे प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कटान मंदिर के काफी करीब पहुंचने से श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर इस इलाके के लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर के महंत बाबा चेतन दास ने बताया कि यह मंदिर लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है। महंत ने कहा कि राप्ती नदी हर साल कटान करते हुए मंदिर के करीब पहुंच रही है। अगर समय रहते कटान रोकने के लिए पक्के इंतजाम नहीं किए गए, तो मंदिर को नुकसान पहुंचने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से मंदिर की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन से राप्ती नदी की कटान रोकने और प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर को सुरक्षित रखने के लिए पक्के इंतजाम करने की मांग की है।
































