तमिलनाडु लाइब्रेरी घोटाला: AI से लिखी गईं किताबें, फर्जी लेखक और नकली प्रकाशकों का हुआ भंडाफोड़

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। कोयंबटूर स्थित पेरीयर अरिवुलागम लाइब्रेरी और साइंस सेंटर में किताबों की खरीद को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रसिद्ध तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन ने आरोप लगाया है कि यहां नकली लेखकों, संदिग्ध प्रकाशकों और एआई से तैयार की गई घटिया किताबें भारी कीमतों पर खरीदी गई हैं।

यह सात मंजिला लाइब्रेरी लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से बनी है। इसका निर्माण पिछली डीएमके सरकार के दौरान शुरू हुआ था और मौजूदा तमिलगा वेट्री कळगम (टीवीके) सरकार के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 16 अक्टूबर को इसका उद्घाटन किया था।⁠

क्या हैं आरोप

पेरूमल मुरुगन ने ऑनलाइन पत्रिका ‘सिंधई’ में विस्तृत लेख लिखकर खुलासा किया कि लाइब्रेरी के तमिल सेक्शन में ‘अगल विलक्कु’ नामक अज्ञात प्रकाशक की करीब 1,800 किताबें रखी गई हैं। ये किताबें 1,400 रुपये या उससे ज्यादा कीमत पर खरीदी गईं, जबकि सामान्य कीमत बहुत कम होती है। ‘फीनिक्स पब्लिकेशंस’ से भी करीब 100 किताबें ली गईं।

इन किताबों में गंभीर गलतियां हैं

  • ‘नलदियार’ को एक प्रसिद्ध तमिल कवि और दार्शनिक बताया गया, जबकि यह जैन संतों के 400 छंदों का संग्रह है।
  • ‘मदुरै कांची’ को एक काल्पनिक राजा द्वारा लिखा गया बताया गया।
  • तमिलनाडु के इतिहास में काल्पनिक मुख्यमंत्री मुथुवेलु सुब्बैया अय्यर का नाम और एम. करुणानिधि को एमके रामासामी बताया गया।
  • कई किताबों में नकली आईएसबीएन नंबर, व्याकरण की गलतियां और एआई-जनरेटेड सामग्री नजर आती है।
  • लेखकों के नाम भी अजीब हैं जैसे त्रिशा विजय, विजय अधितान, मोनिका सूर्या आदि।
  • मुरुगन ने कहा कि ये प्रकाशक नकली पते वाले लगते हैं और सिर्फ किताबें सप्लाई करने के लिए बनाए गए थे। उन्होंने किताबें हटाने और पूरी जांच की मांग की है।⁠

सरकार का रुख और राजनीतिक घमासान

स्कूल शिक्षा मंत्री राज मोहन ने शुक्रवार को कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। जो भी शामिल होगा, उसे कानून के सामने लाया जाएगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विजय ने डीएमके पर हमला बोलते हुए इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बताया। उन्होंने मुरुगन की सराहना की और कहा कि डीएमके ‘भ्रष्टाचार का स्रोत’ है। टीवीके ने फरवरी 2026 का खरीद ऑर्डर भी जारी किया, जो डीएमके शासनकाल का है।

वहीं डीएमके ने पलटवार करते हुए कहा कि विवादित किताबों पर जून का स्टांप है, यानी ये नई सरकार के दौरान आई हो सकती हैं। पार्टी ने पूछा कि किताबें कब खरीदी गईं, किसने मंजूरी दी और कमीशन किसे मिला।

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