खंदारी स्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर से सीधे प्रोफेसर पदनाम दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संस्थान के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. उमापति दीक्षित ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने संस्थान के निदेशक प्रो. हरिशंकर और मंत्रालय को ईमेल भेजकर नियमानुसार निर्णय लेने की मांग की है।
प्रो. दीक्षित ने आरोप लगाया कि पूर्व निदेशक ने संस्थान में वर्ष 2024 में 4 शिक्षकों को कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रोफेसर पदनाम दिया जबकि यह प्रक्रिया यूजीसी विनियम-2018 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने पदनाम देने की प्रक्रिया और उसमें अपनाए गए मानकों पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा संस्थान विश्वविद्यालय के संरचना स्वरूप है क्योंकि यहां कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक बैठते हैं। नॉर्थ ईस्ट से संस्थान 4 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इसकी प्रकृति सामान्य डिग्री कॉलेज से अलग है। ऐसे में शिक्षकों के पदनाम और वरिष्ठता से जुड़े फैसलों में संस्थान की स्थिति और यूजीसी के नियमों को ध्यान में रखना जरूरी है।
केंद्रीय हिंदी संस्थान के कुलसचिव प्रो. जोगेंद्र मीणा ने बताया कि प्रो. उमापति दीक्षित से साक्ष्य मांगे गए लेकिन उन्होंने प्रस्तुत नहीं किए। वहीं, जिस शिक्षिका पर आरोप लगाया है उन्होंने भी मानहानि का मुकदमा करने के लिए संस्थान से अनुमति मांगी है।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026

















