टिनिच। कुआनो नदी का जलस्तर बढ़ने से भानपुर तहसील क्षेत्र में संकट बढ़ गया है। नदी के आसपास के खेतों में खड़ी किसानों की तैयार धान की फसल पानी में डूब गई है। वहीं, धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले रास्तों पर पानी भरने से श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एहतियातन मंदिरों के रास्ते पर बैरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया गया है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है, जबकि पशुपालकों के सामने भी चारे का संकट खड़ा हो गया है।
अजगैवा जंगल स्थित बारहछत्तर धाम जाने वाले रास्ते पर दो फीट पानी बह रहा है। श्रद्धालु मंदिर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। महादेवा मंदिर भी तीन तरफ से पानी से घिर गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर मंदिर के आसपास जलभराव और बढ़ने की आशंका है।
बाढ़ के पानी ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसान गोरखनाथ ने बताया कि उनकी पांच बीघा धान की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन बाढ़ के पानी में डूब गई। अनिल कुमार, अशोक कुमार, त्रिलोकी राम और चरित्र निषाद की फसलें भी जलमग्न हो गई हैं।
किसानों को आशंका है कि पानी में डूबी फसल बर्बाद होने से उनकी जमा पूंजी डूब जाएगी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। बाढ़ का असर पशुपालन पर भी पड़ रहा है। नदी किनारे खाली जमीन पर गाय-भैंस चरने जाती थीं, लेकिन जलभराव के कारण अब पशुओं को घर पर ही चारा देना पड़ रहा है। पशुपालक सुखदेव, जितेंद्र और अनिल कुमार ने बताया कि पशुओं के चरने नहीं जा पाने से दूध उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण पशुओं के खानपान और दूध की मात्रा में भी कमी आ रही है।
प्रशासन को दी गई सूचना अब तक नहीं हुआ आकलन : अजगैवा जंगल के प्रधान प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी ने बताया कि बाढ़ और फसलों के नुकसान की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी गई है, लेकिन अब तक फसलों के नुकसान का आकलन नहीं किया गया है।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026












