बस्ती। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की हड़ताल 28 सितंबर से चल रही हड़ताल से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ताले लटक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। संगठन के अनुसार, रोजाना करीब आठ हजार मरीजों को उपचार और दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
ग्राम पंचायतों में कुल 256 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं। इन केंद्रों पर तैनात सीएचओ के कार्य बहिष्कार से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। मरीजों को अब उपचार के लिए दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ रहा है। सीएचओ संघ अपनी कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण की स्पष्ट नीति लागू करना शामिल है। वे गाइडलाइन के अनुसार मानदेय और प्रोत्साहन राशि में अनियमितता दूर करने की मांग कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष प्रवेश पटेल ने बताया कि मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रहेगी। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने हड़ताल समाप्त कराने के प्रयास की बात कही। उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। मरीजों को सीएचसी-पीएचसी पर भेजकर उपचार दिया जा रहा है।
सीएचओ की प्रमुख मांगें
शहरी सीएचओ संगठन ने बृहस्पतिवार को सीएमओ कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। उन्होंने डीआईओ डॉ. एके चौधरी को ज्ञापन दिया। संगठन ने समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग की है। इस दौरान सुधा गौड़, संयोगिता पांडेय सहित कई सीएचओ मौजूद रहीं। जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में भी टेलीमेडिसिन और फिजियोथेरेपी कक्ष बंद रहे।
एएनएम की हड़ताल और बिगड़ी व्यवस्था
एनएचएम कर्मियों के साथ 210 संविदा एएनएम भी हड़ताल पर हैं। इससे 210 स्वास्थ्य सेंटर बंद हो गए हैं। मरीजों की स्क्रीनिंग और टीकाकरण जैसे कार्य ठप पड़े हैं। उ.प्र. महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता संविदा संघ एएनएम ने मांगें पूरी न होने तक कार्य बहिष्कार जारी रखने को कहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द निर्णय न होने पर इमरजेंसी सेवाएं भी ठप कर दी जाएंगी।
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— Mnt News Bharat (@mntnewsbharat) October 5, 2026










