
बलरामपुर के कृष गोयल ने महज 21 वर्ष की आयु में कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर जिले का नाम रोशन किया है। भगवतीगंज निवासी कृष की इस उपलब्धि से परिवार, शिक्षकों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। अब वे सीएस कृष गोयल के नाम से अपनी पेशेवर पहचान बनाएंगे। कृष गोयल ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा नर्सरी से कक्षा 12वीं तक सेंट जेवियर्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बलरामपुर से सीबीएसई बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम से पूरी की। उन्होंने कक्षा 11 में कॉमर्स स्ट्रीम का चयन किया और पढ़ाई के साथ-साथ कक्षा प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी संभाली। शिक्षक अखिलेश तिवारी के मार्गदर्शन में कृष ने कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने कॉमर्स स्ट्रीम की जिला टॉपर सूची में 10वां स्थान हासिल किया। इसके अतिरिक्त, बिजनेस स्टडीज, अकाउंटेंसी और इकोनॉमिक्स जैसे तीन प्रमुख विषयों में 95-95 अंक प्राप्त किए। स्कूली शिक्षा के उपरांत, कृष ने महारानी लाल कुंवरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एमएलके पीजी कॉलेज), बलरामपुर में बी.कॉम में प्रवेश लिया। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीकृष्ण त्रिपाठी एवं डॉ. के.के. सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। बी.कॉम के प्रथम सेमेस्टर में उन्होंने कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें कॉलेज द्वारा पुरस्कृत और सम्मानित भी किया गया। स्नातक की पढ़ाई के साथ ही कृष ने कंपनी सेक्रेटरी की व्यावसायिक यात्रा शुरू कर दी। सीएस आर्टिकलशिप के दौरान उन्होंने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) के रेगुलेटरी विभाग में कार्य किया, जहां उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें एमडी एवं सीईओ द्वारा सम्मानित किया गया। व्यावसायिक अनुभव को बढ़ाने के लिए उन्होंने एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के साथ भी काम किया और वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। कृष ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता सुभाष चंद्र गोयल एवं मधु अग्रवाल को दिया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने इस पूरी यात्रा में मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से उनका निरंतर साथ दिया। उन्होंने अपने गुरुजनों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। कृष के अनुसार, उनकी इस उपलब्धि में माता-पिता के साथ-साथ स्कूल शिक्षक अखिलेश तिवारी, कॉलेज के मेंटर्स एवं विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीकृष्ण त्रिपाठी और डॉ. के.के. सिंह का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने डॉ. पी.एन. पाठक, डॉ. के.पी. मिश्रा एवं डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव के निरंतर मार्गदर्शन के लिए भी धन्यवाद दिया।




























